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बैतूल में दूषित पानी का कहर: दनवाखेड़ा गांव के 20 बच्चे त्वचा रोग की चपेट में, अस्पताल में भर्ती

बैतूल जिले में दूषित पेयजल की आपूर्ति के कारण बच्चों में त्वचा संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक स्थित दनवाखेड़ा गांव में बड़ी संख्या में बच्चों में खुजली (स्केबीज), सर्दी-खांसी और बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के कम से कम 20 बच्चे त्वचा रोग और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित पाए गए हैं।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए दनवाखेड़ा गांव में एक विशेष मेडिकल कैंप लगाया है, जहाँ बच्चों का इलाज किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज हुरमाड़े ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में एक ही परिवार के कई सदस्यों को भर्ती किया गया है, जिनमें 38 वर्षीय मंगल, 35 वर्षीय कस्तूरी, और 3 माह से लेकर 8 वर्ष तक के पाँच बच्चे शामिल हैं। डॉ. हुरमाड़े के अनुसार, ये सभी मरीज खुजली की बीमारी से ग्रसित हैं, लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में लगातार निगरानी रख रही है।

जांच में त्वचा संबंधी रोगों का मुख्य कारण दूषित पानी सामने आने के बाद, ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने की कड़ी सलाह दी जा रही है। इस बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है।

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूषित पानी के कारण मासूम बच्चों का बीमार होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग छह महीने पहले भी इसी तरह की बीमारी से बच्चों की मौत हो चुकी थी, लेकिन प्रशासन ने उस त्रासदी से कोई सबक नहीं लिया है। श्री सिंह ने कहा कि ग्रामीण लगातार विरोध और शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी भी साफ पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करने और दूषित जल स्रोतों की जांच कर उनमें सुधार करने की मांग की है।

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