
रामनगर। सतना और मैहर जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर क्षेत्र में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के निर्माण में बड़े झोलझाल का मामला प्रकाश में आया है। जिगना से गोरसरी तक करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाई गई पीसीसी पक्की सड़क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। केवल एक साल पहले निर्मित हुई इस सड़क पर जगह-जगह चौड़ी दरारें और बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जो यहाँ हुए घटिया सड़क निर्माण और निर्माण एजेंसी की मनमानी का जीता-जागता सबूत पेश कर रहे हैं। इस जर्जर मार्ग के कारण आए दिन राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस ओर आंखें मूंदे बैठा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिगना से लेकर गोरसरी पहुंच मार्ग तक चमचमाती पक्की पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य 'पीडी अग्रवाल कॉन्सट्रक्सन कंपनी' द्वारा कराया गया था। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में शुरुआत से ही भारी दलाली, कमीशनखोरी और वित्तीय अनियमितताएं हावी थीं। रसूखदारों, रीयल एस्टेट और स्थानीय रसूखदार नेताओं के कथित संरक्षण के चलते ठेकेदार ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया। अफसरों की साठगांठ की वजह से करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन और रद्दी बना दिया गया, जिसका खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है।
निर्माण कार्य की हकीकत यह है कि पूरी सड़क पर अब गहरी और चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। सड़क के दोनों किनारों से सुरक्षा पटरियां (शोल्डर्स) पूरी तरह गायब हैं। इतना ही नहीं, मार्ग में बनाई गई पुलिया भी गुणवत्ताहीन होने के कारण गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। ठेकेदार द्वारा दरारों को छिपाने के लिए कुछ जगहों पर पुल्टिस (लीपापोती) लगाने का प्रयास जरूर किया गया, लेकिन घटिया बेस होने के कारण दरारें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। स्थिति यह है कि दोपहिया और साइकिल चालक इस मार्ग पर संतुलन खोकर लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब इस मार्ग का निर्माण हो रहा था, तब इसे 'ए-क्लास' का काम बताकर जमकर वाह-वाही लूटी गई थी। लेकिन आज यह भ्रष्टाचार का जीवंत नमूना बन चुका है। सड़क की खस्ताहाली के चलते अब तक इस मार्ग पर सैकड़ों छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद, एमपीआरडीसी (MPRDC) के जिम्मेदार महाप्रबंधक और यंत्री जैसे उच्च पदों पर बैठे अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। सड़क की गारंटी अवधि होने के बाद भी मरम्मत और रखरखाव की जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।
जाति और धर्म की राजनीति के बीच विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले रसूखदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता को गुमराह कर अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने में मस्त हैं। वर्तमान में सतना और मैहर जिले के भीतर घटिया संविदाकारी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों और पीडी अग्रवाल कंपनी पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता के पैसों की ऐसी ही बंदरबांट होती रहेगी और लोगों की जान खतरे में बनी रहेगी।
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