
रामनगर। सतना और मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में सरकारी पैसों की बंदरबांट और बुनियादी ढांचा विकास के नाम पर बड़े झोलझाल का मामला सामने आया है। गोविंदगढ़ से जिगना और जिगना से गोरसरी पहुंच मार्ग तक करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाई जा रही सड़कें पहली ही मानसूनी बरसात में ताश के पत्तों की तरह बिखर गई हैं। यहाँ कराया गया घटिया सड़क निर्माण पहली ही बारिश में पूरी तरह बेनकाब हो गया है, जिससे जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपया पानी में बहता नजर आ रहा है।

गोविंदगढ़ से जिगना मार्ग पर चल रहा निर्माण कार्य कछुआ गति से पिछले कई सालों से खिंच रहा है। हाल ही में हुए निर्माण के बाद पहली ही मानसूनी बारिश के थपेड़े से इस नवनिर्मित मार्ग की पटरियां (शोल्डर्स) पूरी तरह पानी में बहकर गायब हो गई हैं। गुणवत्ता के नियमों को ताक पर रखकर यहाँ मानक गिट्टी के बजाय पास के पहाड़ का अनुपयुक्त रोड़ा (पत्थर) और मिट्टी निकालकर काम पूरा किया जा रहा है। इस घोर लापरवाही का आलम यह है कि जल निकासी के लिए बनाई गई सीमेंट की नई पुलियां पहली ही बारिश के बहाव में आई मिट्टी और कीचड़ के नीचे पूरी तरह दफन हो चुकी हैं।

यही हाल जिगना से लेकर गोरसरी तक पिछले साल निर्मित हुई पीसीसी पक्की सड़क का भी है। 'पीडी अग्रवाल कॉन्सट्रक्सन कंपनी' द्वारा बनाई गई इस करोड़ों की सड़क पर जगह-जगह चौड़ी और गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। सड़क के दोनों किनारों की पटरियां गायब हैं और इस मार्ग की पुलिया भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। ठेकेदार द्वारा दरारों को छिपाने के लिए कुछ जगहों पर पुल्टिस (लीपापोती) लगाने का प्रयास जरूर किया गया, लेकिन घटिया बेस होने के कारण दरारें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। जिस काम को 'ए-क्लास' बताकर वाह-वाही लूटी गई थी, वह आज भ्रष्टाचार का जीवंत नमूना बन चुका है।

स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप है कि इन निर्माण कार्यों में अधिकारियों, राजनेताओं और संविदाकार (ठेकेदार) की आपसी साठगांठ और भारी कमीशनखोरी हावी थी। ठेकेदार को मनमानी करने की छूट देकर करोड़ों के काम को पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन कर दिया गया। इस रद्दी सड़क निर्माण के कारण दोपहिया और साइकिल चालक संतुलन खोकर लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। नई सड़क बनने के बाद से अब तक इस मार्ग पर सैकड़ों दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन एमपीआरडीसी (MPRDC) के जिम्मेदार महाप्रबंधक और यंत्री जैसे उच्च पदों पर बैठे अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
कमीशनखोरी के इस खेल में जिम्मेदार लोग अपना बैंक बैलेंस बढ़ा रहे हैं, जबकि आम जनता की जान को खतरे में डाल दिया गया है। वर्तमान में सतना और मैहर जिले के भीतर संविदाकारों की मनमानी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन व्यवस्था की इस बदहाली को पूरी तरह उजागर करता है।
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