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हवाई सफर पर संकट, बंद होने की कगार पर भारतीय एयरलाइंस, जेट फ्यूल की कीमतों ने तोड़ी कमर, सरकार से मांगी इमरजेंसी राहत

नई दिल्ली भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। विमान ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों का दम निकाल दिया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सरकार को आगाह किया है कि अगर जल्द ही दखल नहीं दिया गया, तो कई बड़ी विमानन कंपनियां अपना परिचालन (Operations) पूरी तरह बंद करने को मजबूर हो जाएंगी।

                                   

क्यों खड़ा हुआ यह संकट? विमानन क्षेत्र के इस संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण जेट फ्यूल की आसमान छूती कीमतें हैं। एटीएफ के दाम इतिहास में पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गए हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भारतीय एयरलाइंस की परिचालन लागत (Operating Cost) को 55% से 60% तक बढ़ा दिया है, जबकि सामान्य तौर पर यह 30% के आसपास रहती है।

                                             

सरकार से मांगी 'इमरजेंसी' राहत: संकट को देखते हुए इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के प्रतिनिधित्व वाली संस्था FIA ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है। एयरलाइंस ने सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:

  1. एक्साइज ड्यूटी में कटौती: एटीएफ पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को तुरंत खत्म या कम किया जाए।

  2. VAT का बोझ: राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले भारी-भरकम वैट (VAT) को कम करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश दे।

  3. वित्तीय मदद: परिचालन जारी रखने के लिए विमानन क्षेत्र को विशेष क्रेडिट सपोर्ट या वित्तीय पैकेज दिया जाए।

आम जनता पर क्या होगा असर? इस संकट का सीधा असर आम मुसाफिरों की जेब पर पड़ेगा। यदि सरकार टैक्स में राहत नहीं देती है, तो एयरलाइंस अपने घाटे की भरपाई के लिए हवाई टिकटों के दाम में भारी बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसके अलावा, वित्तीय रूप से कमजोर रूट्स पर उड़ानें बंद की जा सकती हैं, जिससे यात्रियों को कनेक्टिविटी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

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