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ओंकारेश्वर में 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' पर संकट: मुख्य पिलर में झुकाव की रिपोर्ट के बाद लोकायुक्त जांच शुरू, हटाई गईं सुरक्षा चेतावनी


ओंकारेश्वर. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में स्थापित आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा, 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' (Statue of Oneness), विवादों के घेरे में आ गई है। इंटरनेशनल स्ट्रक्चरल एनालिसिस सॉफ्टवेयर (ETABS) की एक तकनीकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रतिमा के मुख्य आंतरिक स्टील पिलर पर तय सीमा से करीब 24 प्रतिशत अधिक भार का दबाव पड़ रहा है, जिसके चलते मुख्य पिलर में हल्का झुकाव देखा गया है। सुरक्षा मानकों की इस गंभीर अनदेखी की शिकायत के बाद इंदौर लोकायुक्त ने मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।

इंजीनियरिंग मानकों का उल्लंघन: 120 किमी की हवा भी झेलना मुश्किल

शिकायत के अनुसार, करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस विशाल प्रतिमा को 140 से 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और चक्रवात को झेलने के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन वर्तमान स्ट्रक्चरल एनालिसिस के मुताबिक, यह ढांचा 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के सामने भी असुरक्षित साबित हो सकता है।

क्या कहता है सुरक्षा पैमाना (Stress Ratio):

मानकों के अनुसार, ऐसी विशालकाय और भारी धातुओं से बनी प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए 'स्ट्रेस रेशियो' (तनाव अनुपात) अधिकतम 0.85 होना चाहिए। लेकिन शंकराचार्य प्रतिमा के मुख्य पिलर का यह रेशियो सुरक्षा सीमा को पार करते हुए 1.244 तक पहुंच गया है, जो किसी बड़े तकनीकी हादसे को न्योता दे सकता है।

चेतावनी देने वाले फील्ड डायरेक्टर को हटाया गया

करोड़ों रुपये के इस 'एकात्म धाम' (Ekatma Dham Project) प्रोजेक्ट में सुरक्षा और तकनीकी खामियों की यह शिकायत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर विश्वजीत बनर्जी ने दर्ज कराई है। बनर्जी ने सीबीआई (CBI), लोकायुक्त और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को सौंपे दस्तावेजों में आरोप लगाया है कि वे पिछले 6 महीनों से मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम और निर्माण कार्य देख रही कंपनी एलएंडटी (L&T) को लिखित में इस खतरे की चेतावनी दे रहे थे। हालांकि, सुधार करने के बजाय इस गंभीर गड़बड़ी को उजागर करने के कारण उन्हें पद से हटा दिया गया।

अधिकारियों के बयानों में अंतर्विरोध, लोकायुक्त ने मांगे सबूत

इस पूरे मामले पर आदि शंकराचार्य न्यास के सीईओ डॉक्टर मनीष पांडेय ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि प्रोजेक्ट का संचालन पर्यटन विभाग कर रहा है, इसलिए वही इस पर जवाब दे सकते हैं। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक (MD) दिलीप यादव ने निर्माण में किसी भी तरह की कमी या लापरवाही से साफ इनकार किया है। उनका दावा है कि निर्माण कार्य देश के शीर्ष विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ है और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है।

फिलहाल, इंदौर लोकायुक्त कार्यालय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए शिकायतकर्ता विश्वजीत बनर्जी से झुकाव और सॉफ्टवेयर एनालिसिस से जुड़े सभी ओरिजिनल दस्तावेज और सबूत मांगे हैं, ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

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