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डबरा: HPV वैक्सीन लगने के बाद 5 किशोरियों की बिगड़ी तबीयत, परिजनों ने लगाया बिना सहमति टीका लगाने का आरोप

ग्वालियर. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे सर्वाइकल कैंसर रोधी टीकाकरण अभियान के बीच ग्वालियर जिले के डबरा से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहाँ पिछोर क्षेत्र के बारकरी जिगनिया गांव की पांच किशोरियों को HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन लगने के बाद अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगीं। प्रभावित बच्चियों—अंजलि, पूनम, रजनी, भारती और रेखा—को चक्कर आने, उल्टी और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत के बाद तत्काल डबरा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से अब सभी बच्चियों की हालत खतरे से बाहर और स्थिर है।

परिजनों का गंभीर आरोप: 'बिना बताए लगाया टीका' इस घटना के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि उनकी बच्चियों को यह वैक्सीन उनकी जानकारी या पूर्व सहमति के बिना ही लगा दी गई। उनका कहना है कि टीकाकरण से पहले न तो उन्हें जोखिमों के बारे में बताया गया और न ही अनुमति ली गई। इस शिकायत के बाद प्रशासन अब टीकाकरण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच कर रहा है कि क्या निर्धारित गाइडलाइंस का पालन किया गया था या नहीं।

क्या है सरकार का मेगा वैक्सीनेशन अभियान? उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश सरकार ने फरवरी-मार्च 2026 के दौरान प्रदेश की लगभग 8 लाख किशोरियों (14-15 वर्ष) को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए मुफ्त टीकाकरण का लक्ष्य रखा है। बाजार में इस वैक्सीन की कीमत 4000 रुपये से अधिक है, जिसे सरकार निशुल्क उपलब्ध करा रही है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है, और विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में ही HPV वैक्सीन लगवाना इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

जांच और सुरक्षा के निर्देश डबरा सिविल अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि कई बार वैक्सीन के बाद घबराहट या मामूली 'रिएक्शन' जैसे लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से निगरानी जरूरी है। इस घटना के बाद क्षेत्र में टीकाकरण अभियान को लेकर थोड़ी हिचकिचाहट देखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी बच्ची को टीका लगाने से पहले उसके अभिभावकों को पूरी जानकारी दी जाए और उनकी लिखित या मौखिक सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए।

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