
दमोह जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आई है। हटा में बुधवार दोपहर को सागर लोकायुक्त की टीम ने एक बड़ी दबिश देते हुए बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JE) राजेश सहाय को उनके ही कार्यालय में 2000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में न सिर्फ जेई, बल्कि उनके साथ सांठगांठ करने वाले एक आउटसोर्स मीटर रीडर संदीप पटेरिया को भी सह-आरोपी बनाते हुए हिरासत में लिया गया है। यह पूरी कार्रवाई एक आरओ वाटर प्लांट के संचालक की शिकायत पर की गई है, जिससे बिजली मीटर का लोड बढ़ाने और कार्रवाई न करने के एवज में रुपयों की मांग की जा रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता इंद्रकुमार पटेल हटा क्षेत्र में 'उपकाशी मिनरल वाटर' नाम से एक आरओ (RO) वाटर प्लांट का संचालन करते हैं। कुछ समय पहले कनिष्ठ अभियंता राजेश सहाय ने उनके इस प्लांट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्लांट में लगे बिजली मीटर का लोड स्वीकृत क्षमता से कम पाया गया था। इसी कमी को आधार बनाकर जेई राजेश सहाय ने प्लांट संचालक को डराना शुरू कर दिया। उन्होंने धमकी दी कि यदि उन्हें 7000 की रिश्वत नहीं दी गई, तो वे उनके खिलाफ 1 लाख का भारी-भरकम बिजली चोरी का केस बना देंगे और प्लांट पर दंडात्मक कार्रवाई करेंगे।
आवेदक इंद्रकुमार पटेल ने बताया कि वे इस मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए कनिष्ठ अभियंता को पहले ही 6000 की राशि दे चुके थे। इसके बावजूद, जेई राजेश सहाय द्वारा लगातार पैसों की मांग की जा रही थी और बकाया 7000 के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इस बार दोनों पक्षों के बीच 2000 को पहली किश्त के तौर पर देने की बात तय हुई थी। लगातार हो रही उगाही से परेशान होकर पीड़ित ने सीधे सागर लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज करा दी।
लोकायुक्त इंस्पेक्टर रंजीत सिंह ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद गुप्त रूप से उसका सत्यापन (Verification) कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात पूरी तरह सही पाई गई। बुधवार दोपहर को योजना के मुताबिक ट्रैप टीम हटा बिजली विभाग के कार्यालय के पास मुस्तैद हो गई। जैसे ही आवेदक इंद्रकुमार पटेल ने कनिष्ठ अभियंता राजेश सहाय को उनके केबिन में जाकर 2000 की केमिकल युक्त राशि सौंपी, वैसे ही इशारा मिलते ही लोकायुक्त की टीम ने उन्हें दबोच लिया। जब उनके हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाए गए, तो उनका रंग तुरंत गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी और मीटर रीडर संदीप पटेरिया की भूमिका भी बेहद संदिग्ध और सहयोगी के रूप में पाई गई है, जिसके चलते उस पर भी शिकंजा कसा गया है। लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। विभाग के भीतर ही इस तरह रंगे हाथों हुई इस गिरफ्तारी के बाद से पूरे बिजली महकमे में हड़कंप मच गया है।
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