
दमोह। जिले से सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। दमोह जिला परिवहन अधिकारी (DTO) क्षितिज सोनी के पिछले कई दिनों से बिना किसी पूर्व सूचना के दफ्तर से नदारद रहने के कारण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO Office) में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। अधिकारी के इस रवैये से वाहन चालकों, आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
7 किलोमीटर दूर से आ रहे लोग, दफ्तर में लटके ताले
दमोह का जिला परिवहन कार्यालय मुख्य शहर से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और शहर से लोग भीषण गर्मी में किराया फूंककर आरटीओ दफ्तर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां उन्हें सिर्फ मायूसी हाथ लग रही है। बुधवार दोपहर जब मीडिया और आम लोग दफ्तर पहुंचे, तो परिवहन अधिकारी का मुख्य कक्ष पूरी तरह बंद मिला। हद तो तब हो गई जब दफ्तर के अन्य कर्मचारियों के चैंबर भी खाली पड़े नजर आए।
परमिट, लाइसेंस और फिटनेस के लिए भटक रहे वाहन चालक
अधिकारी की इस मनमानी के कारण ड्राइविंग लाइसेंस (DL), वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट और कमर्शियल वाहनों के परमिट से जुड़े सैकड़ों जरूरी काम अटक गए हैं:
परमिट के लिए चालान भुगत रहे लोग: ऑटो का परमिट बनवाने आए सचिन उपाध्याय ने बताया कि वे एक महीने पहले अपनी फाइल जमा कर चुके हैं। पिछले चार-पांच दिनों से वे लगातार चक्कर काट रहे हैं। परमिट न होने की वजह से शहर में चल रही पुलिस चेकिंग के दौरान उनका लगातार चालान काटा जा रहा है।
लाइसेंस और फिटनेस अटकी: सुमित यादव अपने ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) के लिए परेशान दिखे, तो वहीं धीरज रजक अपने ऑटो की फिटनेस जांच कराने के लिए दफ्तर के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं।
कंडम वाहनों पर कार्रवाई न करने पर पूर्व कलेक्टर से मिल चुकी है फटकार
दमोह शहर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय में कंडम और बिना फिटनेस के दौड़ रहे वाहनों के कारण कई गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। इस गंभीर मुद्दे पर दमोह के पूर्व कलेक्टर द्वारा जिला परिवहन अधिकारी क्षितिज सोनी को कड़ी फटकार भी लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद आरटीओ विभाग द्वारा सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे इन खटारा वाहनों पर कोई ठोस या बड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
स्टाफ की भारी कमी और प्राइवेट कर्माचारियों का बोलबाला
सूत्रों के मुताबिक, दमोह जिला परिवहन कार्यालय खुद स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। पूरे दफ्तर में परिवहन अधिकारी के अलावा केवल एक ही नियमित बाबू पदस्थ है। काम को संभालने के लिए अधिकारी ने कुछ निजी (प्राइवेट) लड़कों को काम पर रखा हुआ है। लेकिन पिछले शुक्रवार से जब से साहब गायब हैं, ये प्राइवेट कर्मचारी भी दफ्तर से नदारद हैं।
दोनों मोबाइल नंबर स्विच ऑफ, प्रशासन बेखबर
जब इस पूरे मामले और जनता की परेशानी को लेकर जिला परिवहन अधिकारी (DTO) क्षितिज सोनी से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनके दोनों आधिकारिक और निजी मोबाइल नंबर पूरी तरह से बंद (Switch Off) पाए गए। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पिछले शुक्रवार से जब से वह कार्यालय नहीं आए हैं, तभी से उनके फोन बंद हैं। इस संबंध में अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तक्षेप करने की मांग उठ रही है ताकि आम जनता को इस परेशानी से निजात मिल सके।
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