
डिंडौरी. जिले की करंजिया जनपद पंचायत में पिछले लंबे समय से जारी राजनीतिक गतिरोध पर आखिरकार विराम लग गया है. कलेक्टर हर्षिका सिंह (या वर्तमान पदस्थ) ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेल में बंद जनपद अध्यक्ष चरण सिंह धुर्वे को पद से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया है. 21 से अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्तता और बिना सूचना लगातार 6 बैठकों में अनुपस्थित रहने के कारण प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है.
कुर्सी जाने के मुख्य कारण
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में बर्खास्तगी के पीछे दो प्रमुख आधार बताए गए हैं:
बैठकों से नदारद: धुर्वे बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार 6 सामान्य सभा की बैठकों में अनुपस्थित रहे, जिससे क्षेत्र का विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया था.
लोक हित और आपराधिक पृष्ठभूमि: मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत यह माना गया कि आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्ति का सार्वजनिक पद पर बने रहना जनहित में नहीं है.
जिलाबदर की नोटिस का पेच
पुलिस प्रतिवेदन के अनुसार, धुर्वे के खिलाफ जनवरी 2025 में ही जिलाबदर का आदेश जारी हुआ था, लेकिन उनके फरार होने के कारण नोटिस तामील नहीं हो सका था. अब जेल से रिहा होने के बाद उन्हें एक वर्ष के लिए जिले की सीमा से बाहर जाना होगा, जिससे उनके भविष्य में भी अध्यक्षीय जिम्मेदारियां निभाने की कोई संभावना नहीं बची थी.
अब क्या होगा?
जनपद अध्यक्ष की कुर्सी छिनते ही क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. प्रशासन ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेज दिया है. रिक्त हुए पद के लिए जल्द ही नए चुनाव की तिथि घोषित की जाएगी. वर्तमान में करंजिया जनपद में विकास कार्यों की समीक्षा और 15वें वित्त की राशि का आवंटन जैसे महत्वपूर्ण काम अटके हुए हैं, जिन्हें अब गति मिलने की उम्मीद है.
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