
गुना जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है, जहां एक युवक ने दावा किया है कि उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान उसे अचानक होश आ गया। युवक का कहना है कि वह पीएम हाउस (मर्चुरी) से नग्न हालत में बाहर की ओर भागा। हालांकि, इस दावे के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और पूरी घटना को संदिग्ध और भ्रामक बताया है।
हड्डीमिल इलाके के रहने वाले 20 वर्षीय जॉन पारदी नामक युवक ने आत्महत्या की कोशिश में सल्फास खा लिया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। जॉन का आरोप है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और पीएम हाउस भेज दिया। युवक के अनुसार, जब वह पोस्टमार्टम की मेज पर था, तभी उसे होश आया और वह डर के मारे वहां से नग्न अवस्था में ही भाग निकला। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि युवक ने अभी तक इस दावे की पुष्टि के लिए कोई भी सरकारी दस्तावेज (डेथ सर्टिफिकेट या पीएम मेमो) पेश नहीं किया है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजकुमार ऋषेस्वर ने इस खबर को पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 11 मार्च को युवक ने जहरीला पदार्थ खाया था और उसे वार्ड में भर्ती किया गया था, लेकिन वह वहां से अचानक गायब हो गया था। अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को भी दी थी। CMHO ने सवाल उठाया कि पीएम के लिए पुलिस कागजी कार्रवाई करती है और डॉक्टर तभी शव छूते हैं; अगर ऐसा कोई दस्तावेज है तो उसे सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि बिना आधार के ऐसी खबरें फैलाना सरकारी संस्थाओं और डॉक्टरों की साख पर बट्टा लगाने जैसा है, जिससे पूरा स्टाफ आहत है।
गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि वायरल हो रही जानकारी को वेरिफाई किया जा रहा है। शुरुआती जांच में यह खबर सही नहीं पाई गई है, लेकिन प्रशासन हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि युवक मानसिक तनाव में था और वार्ड से भागने की घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। पुलिस अब उन लोगों और स्रोतों की भी जांच कर रही है जिन्होंने बिना किसी ठोस सबूत के इस भ्रामक खबर को हवा दी।
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