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हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का अद्भुत संगम: इस बार 12 दिन मनेगा पावन गणेशोत्सव, जानें शुभ मुहूर्त और विशेष योग


धर्म डेस्क. आगामी 14 सितंबर से शहर में गणेशोत्सव की भव्य और उत्साहपूर्ण शुरुआत होने जा रही है. लंबे अरसे बाद बन रहे एक दुर्लभ खगोलीय व ज्योतिषीय संयोग के चलते इस वर्ष हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का महापर्व एक ही तारीख पर एक साथ मनाया जाएगा. निर्णय सिंधु शास्त्र का हवाला देते हुए परमहंसी गंगा आश्रम के आचार्य पंडित सोहन शास्त्री ने बताया है कि इस पावन अवसर पर चित्रा नक्षत्र, रवियोग, शुभ और शुक्ल योग का एक बेहद विशेष मिलन बन रहा है.

दिन की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में होगी, जो सुबह 6:57 बजे से शुरू होकर पूरे दिन विद्यमान रहेगा. इस दौरान महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और संतान वृद्धि की कामना के लिए ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का कठिन निर्जला व्रत रखेंगी. वहीं दूसरी ओर, घरों और सार्वजनिक पंडालों में प्रथम पूज्य श्रीगणेश के बाल रूप की प्रतिमाओं की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. सामान्य तौर पर मनाए जाने वाले 10 दिनों के मुकाबले इस बार यह गणेशोत्सव पूरे 12 दिनों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा.

पंडालों तथा घरों में रिद्धि-सिद्धि के दाता को विराजमान करने के लिए मध्याह्न काल को सबसे अधिक फलदायी माना गया है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोपहर के समय ही भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था. इस दिन सुबह 11:40 से दोपहर 12:50 बजे तक अभिजीत मुहूर्त की अत्यंत उत्तम बेला रहेगी. इसके अतिरिक्त, भक्तजन सुबह 7:11 से 9:22 बजे, दोपहर 1:39 से 3:26 बजे तथा शाम 4:45 से रात 7:28 बजे तक विभिन्न शुभ चौघड़िया बेला में बप्पा की मूर्ति स्थापित कर सकते हैं. हालांकि, सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक राहुकाल का पहरा रहेगा, जिसमें मूर्ति स्थापना का कार्य पूरी तरह वर्जित माना गया है.

इस बड़े पर्व के मद्देनजर बाजारों में पूजन सामग्री, फल, फूल, वस्त्र, नवीन श्रृंगार और आकर्षक मूर्तियों की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है. महिलाओं ने इस आयोजन को लेकर अपनी विशेष तैयारियां पूरी कर ली हैं. पारंपरिक वेशभूषा धारण कर ढोलक की थाप पर भावपूर्ण नृत्य करते हुए श्रद्धालु अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं.

महिलाएं शाम के समय चार प्रहर की पूजा संपन्न कर हरितालिका व्रत कथा का विधिपूर्वक श्रवण करेंगी. गली-मोहल्लों में सजावट और भव्य झांकियों के निर्माण का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, और श्रद्धालु इस 12 दिवसीय अनुष्ठान की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं. अंततः, पूरे विधि-विधान से पूजित इन पार्थिव गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितंबर को संपन्न कराया जाएगा, जिसके साथ ही इस दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रों वाले महामहोत्सव का समापन होगा.

Date & Time : 2026-09-12 07:47:36

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