
मुंबई. साल 2026 की सबसे बड़ी एक्शन थ्रिलर मानी जा रही 'धुरंधर 2: द रिवेंज' रिलीज हो गई है. फिल्म वहीं से शुरू होती है जहाँ पहला भाग खत्म हुआ था, लेकिन इस बार जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) का मिशन व्यक्तिगत बदले से कहीं ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के चक्रव्यूह में फंस जाता है.
कहानी: अंडरकवर मिशन और राजनीति का घालमेल
फिल्म की शुरुआत जसकीरत के अतीत के जख्मों से होती है. जेल की सलाखों से निकलकर वह भारत के लिए एक खतरनाक मिशन चुनता है—पाकिस्तान के ल्यारी में 'हमजा अली मजारी' बनकर घुसपैठ करना. कहानी में नोटबंदी, अतीक अहमद हत्याकांड के संदर्भ और सत्ता के गलियारों की साज़िशों को पिरोया गया है. 'बड़े साहब' का रहस्य फिल्म का मुख्य आकर्षण है, जो पूरी कहानी को बांधे रखता है.
अभिनय: रणवीर सिंह की 'वन मैन शो' परफॉर्मेंस
रणवीर सिंह: फिल्म पूरी तरह से रणवीर के कंधों पर टिकी है. जसकीरत और हमजा, दोनों किरदारों के बीच का अंतर उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वेज और एटीट्यूड से बखूबी दिखाया है.
सपोर्टिंग कास्ट: आर. माधवन अपनी उपस्थिति से फिल्म में गहराई लाते हैं. संजय दत्त का कैमियो प्रभावशाली है, लेकिन अर्जुन रामपाल इस बार विलेन के रूप में थोड़े फीके साबित हुए हैं. राकेश बेदी एक बार फिर सरप्राइज पैकेज बनकर उभरे हैं.
निर्देशन और तकनीकी पक्ष: स्केल बड़ा, पर रफ्तार सुस्त
आदित्य धर ने फिल्म के स्केल को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया है. सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस विश्वस्तरीय हैं. हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी एडिटिंग है.
फर्स्ट हाफ: कहानी काफी धीमी गति से बढ़ती है और कई जगह डॉक्यूमेंट्री जैसी लगने लगती है.
सेकंड हाफ: इंटरवल के बाद फिल्म रफ्तार पकड़ती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते दर्शक अपनी सीटों से चिपक जाते हैं.
संगीत: फिल्म का म्यूजिक पहले पार्ट की तुलना में कमजोर है. केवल 'आरी आरी' जैसे कुछ गाने ही याद रह जाते हैं.
फिल्म देखें या नहीं?
अगर आप रणवीर सिंह के प्रशंसक हैं और आपको पॉलिटिकल-एक्शन ड्रामा पसंद है, तो 'धुरंधर 2' एक बार थिएटर में जरूर देखी जा सकती है. फिल्म का स्केल और क्लाइमैक्स आपको निराश नहीं करेगा, बस स्क्रिप्ट की कुछ कमियों और फिल्म की लंबाई के लिए तैयार रहें.
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