
मंडला जिले में धान खरीदी का मामला अब एक चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गया है। खरीफ सीजन के समाप्त होने के बाद भी नागरिक आपूर्ति निगम (नान) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला उस वक्त सामने आया, जब कुआं-अंकुरी स्थित अनुसुईया स्व सहायता समूह से खरीदी गई धान की बोरियां गोदाम पहुंचीं और जांच के दौरान इनमें धान की जगह ईंट-पत्थर निकलने लगे। इस सनसनीखेज खुलासे ने खरीदी केंद्रों और नान की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
गोदाम में बोरियों को जमा करने से पहले की गई जांच में पाया गया कि धान की गुणवत्ता बेहद खराब थी। काले रंग की धान के बीच बड़े-बड़े पत्थर और ईंट के टुकड़े मिले। इसके अलावा धान में नमी की मात्रा 16.5 प्रतिशत तक पाई गई, जबकि नियमों के अनुसार 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाली धान की खरीदी नहीं की जा सकती।
धान परिवहन का काम करने वाली सानू ट्रांसपोर्ट के दो ट्रक गुरुवार को गोदाम पहुंचे थे, जिनमें 700 और 900 बोरियां लदी हुई थीं। एक दिन पहले इसी केंद्र से आई 53 बोरियों की एक लॉट में भी ईंट-पत्थर और खराब धान पाए गए थे, जिन्हें गोदाम में रखने से मना कर दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, खराब धान को लेकर आपत्ति जताने के बावजूद नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बोरियां गोदाम में रखने का दबाव डाला। अधिकारियों का कहना था कि गोदाम का काम केवल तौल और भंडारण तक ही सीमित है, न कि गुणवत्ता जांच। इस पूरे घटनाक्रम ने नान की निगरानी व्यवस्था और सर्वेयरों की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
नान के प्रबंधक एम.एस. उपाध्याय ने बताया कि मामले की सूचना मिलते ही पंचनामा तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला आपूर्ति अधिकारी के नेतृत्व में शुक्रवार को एक जांच टीम भेजी जाएगी, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी।
Leave A Reviews