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डीयू में ‘प्रथम सिंधु कुंभ’ पुस्तक का विमोचन, विजेंद्र गुप्ता बोले- हमें जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है सिंधु दर्शन यात्रा


नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में ‘प्रथम सिंधु कुंभ: आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार शामिल हुए।

नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में ‘प्रथम सिंधु कुंभ: आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार शामिल हुए।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पिछले लगभग 30 वर्षों से सिंधु दर्शन यात्रा देशभर के लोगों को हमारी जड़ों, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। सिंधु दर्शन समिति द्वारा भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभाव और सभ्यतागत मूल्यों के संरक्षण एवं पुनर्जागरण के लिए किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं।

सिंधु यात्रा पर विधानसभा स्पीकर ने कहा कि यह एक बहुत जरूरी यात्रा है और सभी को सिंधु दर्शन से जुड़ना चाहिए। सिंधु नदी के इतिहास को समझना चाहिए। यह सच में हमारी सभ्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सिंधु माता भजन और आरती का प्रोग्राम भी हुआ। यहां बहुत सारे लोग मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की झलक के तौर पर सिंधु दर्शन यात्रा समिति ने यहां एक किताब का विमोचन समारोह किया। 23 से 25 जून तक होने वाले सिंधु दर्शन कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला गया और इंद्रेश कुमार ने जड़ों से जुड़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मैं कह सकता हूं कि हिंद और हिंदू जैसे शब्दों की ऐतिहासिक जड़ें सिंधु से जुड़ी हैं। हमारी भाषाएं भले ही अलग हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पहले, कई जानकारों ने मुझे बताया था कि सिंधु भारत में नहीं है। हम भी मानते थे कि हमने सिंधु खो दी है, लेकिन, सिंधु भारत के अंदर लगभग 250-300 किलोमीटर तक बहती है और इसका एक लिखा हुआ इतिहास है। इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत, सिंधु (इंडस) का करीब 300 किलोमीटर हिस्सा हमारे कंट्रोल में है, तो यह साफ हो गया कि सिंधु का करीब 300 किलोमीटर हिस्सा भारत में है। हमने पूरी सिंधु नहीं खोई है। सिंधु का एक बड़ा हिस्सा अभी भी हमारे पास है। हमने सिंधु के साथ करीब 30-40 किलोमीटर तक सफर किया, जिसके बाद इसका वजूद खत्म हो जाता है और यह पाकिस्तान में चली जाती है।

समय के साथ सिंधु सिर्फ एक नदी बनकर रह गई है। नदी के तौर पर भी यह इतने सालों से मौजूद है। इस तरह, सिंधु, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी सभ्यताओं में से एक का हिस्सा माना जाता है, पर काम किया जाना चाहिए और उसे बचाया जाना चाहिए, क्योंकि यह हमारी पहचान है। दुनिया हमें इसी नाम से पहचानती है, लेकिन हमारी पहचान हमसे छीन ली गई है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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