Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

महंगाई का दोहरा झटका: थोक महंगाई 38 महीने के उच्चतम स्तर पर, मार्च में 3.88% पहुंची

नई दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मार्च का महीना महंगाई के मोर्चे पर भारी रहा. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर उछलकर 3.88% पर पहुंच गई है. यह पिछले 38 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है. फरवरी में यह दर 2.13% थी, जिसका अर्थ है कि महज एक महीने में थोक महंगाई में 1.75% की भारी वृद्धि हुई है.

क्यों बढ़ी महंगाई?
महंगाई के इस उछाल के पीछे मुख्य कारण कच्चे पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतें, बिजली और प्राथमिक वस्तुओं के दामों में इजाफा होना है. वैश्विक स्तर पर इजराइल-ईरान संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनावों ने भी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है.

महंगाई के आंकड़ों का विश्लेषण:
आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में महंगाई का प्रभाव इस प्रकार रहा:

प्राइमरी आर्टिकल्स: रोजाना की जरूरत के सामानों की थोक महंगाई दर 3.27% से बढ़कर 6.36% हो गई.

ईंधन और बिजली: फ्यूल एंड पावर सेक्टर, जो पहले माइनस 3.78% पर था, अब बढ़कर 1.05% पर पहुंच गया है.

मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स: निर्मित उत्पादों की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी देखी गई और यह 3.39% रही.

रिटेल महंगाई: आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालने वाली खुदरा महंगाई (CPI) भी मार्च में बढ़कर 3.4% पर पहुंच गई.

WPI का वेटेज और आम जनता पर असर
थोक महंगाई में सबसे ज्यादा हिस्सा मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स (64.23%) का होता है. इसके बाद प्राइमरी आर्टिकल्स (22.62%) और फ्यूल (13.15%) का स्थान आता है. थोक कीमतों में वृद्धि का सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में खुदरा बाजार में सामान और भी महंगे हो सकते हैं, जिससे आम जनता के घरेलू बजट पर बोझ बढ़ेगा.

Share:

Leave A Reviews

Related News