
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा के बीच भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद की है. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बोलते हुए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
भारत के ऊर्जा और आर्थिक हितों पर खतरा
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पी ने 'वीटो पहल' के तहत आयोजित बहस के दौरान समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंताएं साझा कीं. उन्होंने जोर देकर कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए जीवन रेखा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का भी एक मुख्य स्तंभ है.
भारतीय नाविकों की शहादत पर दुख
भारत ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि जारी संघर्ष में निर्दोष भारतीय नाविकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. हरिश पी ने कहा:
"नागरिक जहाजों और चालक दल को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है. निर्दोष नाविकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए."
संयम और कूटनीति की अपील
28 फरवरी 2026 को क्षेत्र में शुरू हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए भारत ने सभी पक्षों से संयम (Restraint) बरतने की अपील की है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में निर्बाध नौवहन (Freedom of Navigation) सुनिश्चित किया जाए.
तनाव कम करने के लिए कूटनीति और संवाद (Dialogue & Diplomacy) का सहारा लिया जाए.
समुद्री क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूर्ण रूप से पालन हो.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख खाड़ी क्षेत्र में अपनी बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक भूमिका को रेखांकित करता है.
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