
पाटन, देशबन्धु। जिले के सिविल अस्पताल से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया। पाटन सिविल अस्पताल में 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए शासन द्वारा गार्डासिल-4 (Gardasil-4) वैक्सीन उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन अब आरोप है कि इस जीवन रक्षक वैक्सीन के वितरण में भारी अनियमितता की गई है।
इस पाटन वैक्सीन घोटाला में लाखों रुपये की वैक्सीन के गबन का अंदेशा जताया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी विनय डेविड ने 16 जून 2026 को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया। उन्होंने 98 पन्नों का एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। इसमें पाटन सिविल अस्पताल के बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) डॉक्टर आदर्श विश्नोई पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, शासन द्वारा पाटन क्षेत्र की किशोरियों के लिए गार्डासिल-4 वैक्सीन के कुल 1589 डोज भेजे गए थे। बाजार में इसके एक डोज की कीमत लगभग 3534 रुपये है। इस हिसाब से पूरी वैक्सीन की कुल अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
इस पाटन वैक्सीन घोटाला में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यूविन (U-WIN) पोर्टल पर वास्तविक हितग्राहियों की जानकारी के साथ जमकर छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए ओटीपी हासिल कर टीकाकरण की झूठी एंट्री दर्ज की गई। दस्तावेजों में 100 प्रतिशत टीकाकरण दिखा दिया गया, जबकि असलियत में बड़ी संख्या में बच्चियों को यह टीका लगा ही नहीं। पोर्टल पर एक ही मोबाइल नंबर से अलग-अलग समाज और वर्ग की कई किशोरियों का पंजीयन मिला है।
शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए बीएमओ डॉ. आदर्श विश्नोई को नोटिस जारी किया। उन्हें तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
हैरानी की बात यह है कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी बीएमओ की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। जवाब न देने की इस स्थिति ने इस पाटन वैक्सीन घोटाला में दाल में कुछ काला होने के शक को और भी गहरा कर दिया है।
इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों और किशोरियों के परिजनों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जोरदार मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही, वास्तविक हकदार बच्चियों का तत्काल टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
लोगों का साफ कहना है कि वैक्सीन की असल उपलब्धता और उसके उपयोग की बारिकी से जांच होनी चाहिए। जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस पाटन वैक्सीन घोटाला में दोषी पाया जाए, उस पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन आगे क्या कड़े कदम उठाता है।
Leave A Reviews