
नई दिल्ली/भोपाल. देशभर में आज ईद-उल-फित्र का त्यौहार अकीदत के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार उल्लास के बीच वैश्विक तनाव का साया साफ नजर आया. मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष और ईरान-इजराइल जंग के विरोध में शिया समुदाय ने कई राज्यों में 'काली ईद' मनाई. भोपाल से लेकर राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक, नमाजियों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया.
भोपाल में 'मुर्दाबाद' के नारे और श्रद्धांजलि
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के फतेहगढ़ इमामबाड़ा में नमाज के बाद माहौल तब गरमा गया जब प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इमामबाड़ा में अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. मौलाना राजी उल हसन ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम हमेशा जुल्म के खिलाफ खड़े होने की सीख देता है.
राजस्थान में फीका रहा जश्न, नहीं बनीं सेवइयां
राजस्थान के जयपुर, अजमेर और सीकर में विरोध का अनोखा तरीका देखने को मिला. यहाँ शिया समुदाय के लोगों ने न केवल काली पट्टी बांधी, बल्कि विरोध स्वरूप नए कपड़े भी नहीं पहने. कई घरों में ईद की पारंपरिक मिठास (खीर और सेवइयां) भी नहीं घुली. मस्जिदों की मीनारों पर काले झंडे लगाकर वैश्विक हिंसा का विरोध किया गया.
बंगाल और कश्मीर में भी विरोध का स्वर
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में भी नमाज के दौरान लोग गमगीन नजर आए. रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर बाबरी मस्जिद की याद और फिलिस्तीन के समर्थन में विशेष दुआएं मांगी गईं. वहीं, अजमेर शरीफ दरगाह में सुबह 5 बजे पारंपरिक रूप से 'जन्नती दरवाजा' खोला गया, जहाँ हजारों जायरीन ने मुल्क में अमन-चैन की दुआ की.
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