
छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र से पिता और बच्चों के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां तिवारी मोहल्ले में रहने वाले एक सनकी पिता ने अपने ही 8 वर्षीय बेटे और 5 वर्षीय बेटी को कमरे में बंद कर आग लगा दी। घटना उस समय की है जब बच्चों की मां मायके गई हुई थी। गनीमत रही कि समय रहते पड़ोसियों ने मकान से धुआं उठता देख लिया और अपनी जान पर खेलकर बच्चों को आग की लपटों से बाहर निकाला। फिलहाल दोनों बच्चों का इलाज अस्पताल में जारी है और पुलिस ने आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया है।
रोते बच्चों की आवाज सुनकर पत्नी को हुआ शक मिली जानकारी के अनुसार, मूल रूप से टीकमगढ़ निवासी राघवेंद्र तिवारी नौगांव में ड्राइवरी का काम करता है। शुक्रवार सुबह उसकी पत्नी अपने मायके गई थी, जिसके बाद राघवेंद्र का व्यवहार हिंसक हो गया। शाम को उसने पहले दोनों मासूमों के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर उन्हें एक कमरे में बंद कर आग लगा दी। इसी दौरान जब उसकी पत्नी ने फोन किया, तो उसे बच्चों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दीं, जिससे उसे अनहोनी का अंदेशा हुआ।
पड़ोसियों ने मसीहा बनकर बचाई जान मकान से धुआं निकलता देख पड़ोसी सागर सिंह और उनके साथी तुरंत मौके पर पहुंचे। जब उन्होंने अंदर जाने की कोशिश की, तो आरोपी राघवेंद्र हाथ में पत्थर लेकर उन्हें डराने लगा। लेकिन पड़ोसियों ने हिम्मत नहीं हारी और अंदर घुसकर देखा कि कमरे के कोने में दोनों बच्चे डरे-सहमे लिपटे हुए थे और उनके कपड़ों में आग लग चुकी थी। सागर सिंह ने तत्काल आग बुझाई और बच्चों को बाहर निकालकर नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टर के अनुसार बच्चे झुलस गए हैं और गहरे सदमे में हैं।
तांत्रिक के संपर्क में था आरोपी, मानसिक स्थिति भी संदिग्ध सूचना मिलते ही नौगांव पुलिस ने आरोपी राघवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि आरोपी हाल ही में गुजरात से स्कूटी चलाकर नौगांव आया था और उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं लग रही है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि वह पिछले कुछ समय से किसी तांत्रिक के संपर्क में था, जिससे इस घटना के पीछे किसी अंधविश्वास या तांत्रिक क्रिया की आशंका भी जताई जा रही है। नौगांव टीआई संजय राय ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की गहनता से जांच जारी है।
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