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नतांज पर भीषण प्रहार: US-इस्राइल ने ईरान के मुख्य परमाणु केंद्र को बनाया निशाना, पश्चिम एशिया में हड़कंप

तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और शनिवार को ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण नतांज परमाणु सुविधा पर हुए हवाई हमले ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। आधिकारिक ईरानी समाचार एजेंसी 'मिजान' के अनुसार, तेहरान से 220 किलोमीटर दूर स्थित इस मुख्य परमाणु संवर्धन स्थल को निशाना बनाया गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और स्थानीय प्रशासन ने किसी भी प्रकार के रेडियोधर्मी रिसाव (Radiation Leak) से इनकार किया है। नतांज पहले भी जून 2025 और हाल के महीनों में अमेरिका-इजराइल के हमलों का केंद्र रहा है, जिससे इसकी संरचना को काफी नुकसान पहुँचा है।

यह हमला एक ऐसे संवेदनशील समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दुविधा में डाल दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के 'बेहद करीब' है और अभियानों को समाप्त करने पर विचार कर रहा है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है; अमेरिका ने क्षेत्र में तीन और युद्धपोत और 2,500 अतिरिक्त मरीन सैनिकों की खेप भेजी है। इसके अलावा, युद्ध के वित्तपोषण के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की गई है, जो ट्रम्प के 'शांति' के दावों पर सवालिया निशान लगाता है।

युद्ध की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस समय ईरानी नागरिक अपना पारंपरिक नव वर्ष 'नौरोज' मना रहे थे, उसी समय इजराइली विमानों ने तेहरान के आसमान में गोलाबारी की। जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइलें दागीं और सऊदी अरब के पूर्वी तेल प्रतिष्ठानों की ओर ड्रोन भेजे, जिनमें से 22 को सऊदी एयर डिफेंस ने मार गिराया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने नौरोज के संदेश में जनता के साहस की सराहना की है, लेकिन युद्ध की समाप्ति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

खतरा अब केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान के शीर्ष सैन्य प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेकार्ची ने खुली चेतावनी दी है कि उनके दुश्मनों के लिए दुनिया भर के पार्क, मनोरंजन क्षेत्र और पर्यटन स्थल अब सुरक्षित नहीं रहेंगे। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर आतंकी हमलों की आशंका को बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, ईंधन की आसमान छूती कीमतों और शेयर बाजार की गिरावट को देखते हुए ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है, ताकि आपूर्ति सुचारू की जा सके। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या यह परमाणु हमला किसी बड़ी वैश्विक त्रासदी का आगाज़ तो नहीं है।

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