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कूनो से नौरादेही जाएंगे चार चीते: देश का पहला टाइगर रिजर्व बनेगा जहाँ साथ दिखेंगे बाघ, तेंदुआ और चीता

श्योपुर. मध्य प्रदेश में 'चीता स्टेट' की पहचान को और मजबूत करते हुए कूनो नेशनल पार्क से चीतों को दूसरे अभयारण्यों में बसाने की तैयारी तेज हो गई है। कूनो में बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों में से चार को अब सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में शिफ्ट किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत एक नर और तीन मादा चीतों को मई-जून तक नए आशियाने में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में भी तीन चीते सफलतापूर्वक शिफ्ट किए जा चुके हैं।

2339 वर्ग किलोमीटर में फैला नौरादेही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। चीतों के आगमन के साथ ही यह देश का इकलौता ऐसा वन्यजीव क्षेत्र बन जाएगा, जहाँ बाघ, तेंदुआ और चीता एक ही जंगल में सह-अस्तित्व में रहेंगे। चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि 'टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (NTCA) और 'वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया' (WII) की टीम ने साइट का चयन कर लिया है और वर्तमान में तकनीकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

चीतों की सुरक्षा और उनकी सुविधा के लिए अभयारण्य की मोहली रेंज को चुना गया है, जहाँ घास के विशाल मैदान और पर्याप्त संख्या में शाकाहारी वन्यजीव मौजूद हैं। यहाँ लगभग 1000 एकड़ (400 हेक्टेयर) क्षेत्र में एक सुरक्षित बाड़ा तैयार किया जा रहा है। शिफ्टिंग के बाद चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन बाड़े में रखा जाएगा, ताकि वे नए माहौल में पूरी तरह ढल सकें। इसके बाद ही उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पहले चरण के लिए 5 करोड़ रुपए की राशि मंजूर कर दी है। जल्द ही मुख्यमंत्री द्वारा इस कार्य का भूमिपूजन किया जाएगा। नौरादेही प्रबंधन ने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए सिंगपुर और झापन रेंज को भी चिन्हित किया है, ताकि आने वाले समय में चीतों के कुनबे का विस्तार किया जा सके।

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