
कोलकाता. भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती एक बार फिर पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों में देखने को मिली है। जहां एक ओर बड़े-बड़े दिग्गजों की साख दांव पर थी, वहीं ऑसग्राम (SC) विधानसभा सीट से एक ऐसी महिला ने जीत दर्ज की है, जिसकी कहानी सुनकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा। यह कहानी है कलिता माजी की, जो कल तक दूसरों के घरों में बर्तन मांजती थीं और आज जनता के आशीर्वाद से 'माननीय विधायक' बन गई हैं।
कलिता माजी की जीवन यात्रा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। राजनीति में आने से पहले और चुनाव लड़ने के दौरान भी कलिता एक साधारण घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं।
साधारण जीवन: कलिता पिछले दो दशकों से दूसरों के घरों में साफ-सफाई और बर्तन धोने का काम करती थीं।
सीमित आय: इस कड़ी मेहनत के बदले उन्हें महीने के मात्र 2,500 रुपये मिलते थे, जिससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं।
कड़ी मेहनत: चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने अपनी सादगी नहीं छोड़ी और पैदल चलकर घर-घर जाकर लोगों से वोट मांगे।
ऑसग्राम (सुरक्षित) सीट पर कलिता माजी ने भाजपा (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने प्रतिद्वंद्वी को करारी शिकस्त दी।
किसे हराया: कलिता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता श्यामा प्रसन्ना लाहौर को 12,535 वोटों के बड़े अंतर से मात दी।
वोटों का आंकड़ा: माजी को कुल 1,07,692 वोट मिले, जो उनकी लोकप्रियता और जनता के अटूट भरोसे को दर्शाता है।
कलिता माजी की यह जीत रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे एक दशक का लंबा संघर्ष है।
बूथ कार्यकर्ता से शुरुआत: कलिता ने अपनी राजनीतिक पारी एक साधारण बूथ स्तर की कार्यकर्ता के रूप में शुरू की थी।
पंचायत चुनाव: वह पहले पंचायत चुनाव भी लड़ चुकी हैं, जिससे उन्हें जमीनी स्तर की समस्याओं की गहरी समझ हुई।
2021 का चुनाव: बीजेपी ने उन पर पिछली बार भी भरोसा जताया था। तब वह 41% वोट पाने के बावजूद करीब 12,000 वोटों से हार गई थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जनता के बीच काम करती रहीं।
कलिता माजी की जीत यह साबित करती है कि भारतीय लोकतंत्र में धन-बल और संसाधनों की कमी किसी के सपनों में बाधा नहीं बन सकती। एक घरेलू कामगार का विधानसभा पहुंचना उन लाखों आम नागरिकों के लिए प्रेरणा है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े होकर देश सेवा का सपना देखते हैं।
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