Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

डीपफेक पर गुजरात हाईकोर्ट का सख्त रुख: गूगल, मेटा और एक्स समेत टेक कंपनियों को नोटिस, 'सहयोग पोर्टल' से जुड़ने के निर्देश

अहमदाबाद। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार किए जा रहे डीपफेक वीडियो और तस्वीरों के बढ़ते खतरे को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने मेटा इंडिया, गूगल, एक्स (X), रेडिट और स्क्रिप्ड जैसी प्रमुख टेक कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए अवैध सामग्री पर समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी।

'सहयोग पोर्टल' से जुड़ना होगा अनिवार्य अदालत ने सभी इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को केंद्र सरकार के 'सहयोग पोर्टल' से जुड़ने का निर्देश दिया है। अक्टूबर 2024 में शुरू किए गए इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों और टेक कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर अवैध कंटेंट को तुरंत हटाना है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सार्थकता और कानून के प्रति उनकी जवाबदेही इसी बात से तय होगी कि वे शिकायतों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं। सभी कंपनियों को इस मामले में 8 मई 2026 तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना है।

एक्स (X) के रवैये पर केंद्र ने जताई नाराजगी सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय के माध्यम से कुछ कंपनियों, विशेषकर 'एक्स' के असहयोगात्मक रवैये पर चिंता व्यक्त की। मंत्रालय ने अदालत को बताया कि 2024 से 2026 के बीच एक्स को एआई-जनित अवैध कंटेंट हटाने के लिए 94 बार सूचित किया गया, लेकिन केवल 13 मामलों में ही औपचारिक उत्तर मिला। हालांकि, इस दौरान कुल 864 यूआरएल (URLs) ब्लॉक किए गए, लेकिन अनुपालन की गति बहुत धीमी है। दूसरी ओर, सरकार ने स्वीकार किया कि मेटा और गूगल ने अपनी दक्षता में कुछ सुधार किया है।

कानूनी ढांचे को मजबूत करने की मांग याचिकाकर्ता और राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष दलील दी कि मौजूदा आईटी एक्ट, 2000 और भारतीय न्याय संहिता एआई की आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। एआई आधारित फर्जी फोटो और वीडियो न केवल व्यक्तिगत सम्मान, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए भी गंभीर खतरा हैं। राज्य सरकार ने सुझाव दिया कि एक ऐसी नियामक व्यवस्था बनाई जाए जिसमें जांच एजेंसियों और प्लेटफॉर्म्स के बीच रियल-टाइम समन्वय और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हो।

Share:

Leave A Reviews

Related News