
भोपाल। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिए गए हैं। उनके इस निर्वाचन के साथ ही प्रदेश में राज्यसभा सीटों का गणित भी पूरी तरह बदल गया है। मध्यप्रदेश की कुल 11 राज्यसभा सीटों में से अब भारतीय जनता पार्टी के पास 10 सीटें हो गई हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में केवल 1 सीट रह गई है। इससे पूर्व सदन में भाजपा के 9 और कांग्रेस के 2 सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन द्वारा 14 अक्टूबर को इस्तीफा दिए जाने के बाद रिक्त हुई थी। निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा के बाद भाजपा ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। पुरी ने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की उपस्थिति में विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था।
नामांकन पत्रों की संवीक्षा के दौरान कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी के शपथपत्र में 100 से अधिक त्रुटियां होने का दावा किया था। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुख्य रूप से पत्नी के नाम का उल्लेख न होने, विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों का विवरण अमेरिकी डॉलर व स्विस फ्रैंक में दर्ज करने तथा नोटरी प्रमाणीकरण को लेकर लिखित आपत्तियां उठाई थीं। रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, जिसके आधार पर कांग्रेस की सभी आपत्तियां खारिज कर दी गईं।
इसके अतिरिक्त, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी का नामांकन अनिवार्य फॉर्म-26 शपथपत्र संलग्न न होने के कारण निरस्त कर दिया गया। एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी कांते सायन्ना का पर्चा भी अधूरी जानकारियों के कारण खारिज हो गया। दोनों प्रतिद्वंद्वियों के नामांकन रद्द होने से पुरी मैदान में एकमात्र वैध प्रत्याशी बचे और उनके निर्विरोध निर्वाचन की विधिवत घोषणा कर दी गई।
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