
नई दिल्ली। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर निर्विरोध राज्यसभा के उपसभापति चुन लिए गए हैं। यह उनका इस गरिमामय पद पर लगातार तीसरा कार्यकाल है। पिछले सप्ताह ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति के बाद खाली हुई सीट पर राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। 69 वर्षीय हरिवंश अब 2032 तक सदन के उपसभापति के रूप में अपनी सेवाएं देंगे।
पीएम मोदी ने सराहा अनुभव और कार्यशैली हरिवंश की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि लगातार तीसरी बार चुना जाना सदन के उनके प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक है। पीएम ने उनके पिछले कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा, "हरिवंश जी के अनुभव का सदन को लाभ मिलेगा। सबको साथ लेकर चलने का उनका प्रयास और सहज कार्यशैली ही उनकी ताकत है, जिसे सदन ने आज अपनी मुहर लगाकर स्वीकार किया है।" उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हरिवंश के नेतृत्व में सदन की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ मिलेंगी।
विपक्ष ने भी दी शुभकामनाएँ राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी उन्हें बधाई दी। खरगे ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति बनने वाले पहले 'मनोनीत' सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि हरिवंश इस पद के पूरी तरह हकदार हैं। सदन के अन्य सदस्यों ने भी उनकी निष्पक्षता और संसदीय कार्यप्रणाली की गहरी समझ की प्रशंसा की।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर उत्तर प्रदेश के बलिया में 30 जून 1956 को जन्मे हरिवंश का गहरा जुड़ाव जेपी की जन्मस्थली सिताब दियारा से भी है। बीएचयू (BHU) से अर्थशास्त्र में एम.ए. और पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले हरिवंश छात्र जीवन से ही जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों से प्रभावित रहे हैं। 2014 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू की ओर से राज्यसभा भेजकर सक्रिय राजनीति में उतारा था, जिसके बाद से वे अपनी सादगी और विद्वता के कारण भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरे हैं।
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