
बालाघाट जिले के आदिवासी बैगा बाहुल्य गांवों में बच्चों में फैली अज्ञात बीमारी और मौतों के कारणों का आधिकारिक तौर पर खुलासा हो गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों में मीजल्स (खसरा) और मलेरिया संक्रमण फैलने से यह स्थिति बनी थी। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर कुमार सत्यम ने मौतों के कारणों की पुष्टि कर दी है।
प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की 5 सदस्यीय टीम ने 13 से 15 अगस्त तक सघन दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। बच्चों के सैंपल जांच के लिए NIV ICMR पुणे भेजे गए थे।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, चांदीपुरा वायरस, वेस्ट नाइल फीवर और जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) जैसे खतरनाक वायरस की रिपोर्ट निगेटिव आई है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मौतों की मुख्य वजह गंभीर मीजल्स और मलेरिया संक्रमण के साथ-साथ समय पर उपचार न मिलना रही।
कलेक्टर कुमार सत्यम के अनुसार, वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है:
घर-घर जांच: प्रभावित क्षेत्रों में 20 विशेष मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं, जो घर-घर जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं।
अस्पताल में उपचार: लक्षण दिखने वाले बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। अब तक 135 बच्चों को समुचित उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ कर घर भेजा जा चुका है।
संक्रमण की रोकथाम और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने व्यापक टीकाकरण अभियान की रूपरेखा तैयार की है:
अभियान की शुरुआत: 20 अगस्त से बिरसा विकासखंड से विशेष एमआर (Measles-Rubella) कैचअप राउंड शुरू किया जाएगा।
लक्षित आयु वर्ग: 9 माह से 10 वर्ष तक के सभी बच्चों को मीजल्स-रूबेला वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी।
प्रभावित विकासखंड: यह विशेष अभियान 20 से 25 अगस्त तक आदिवासी बाहुल्य बैहर, बिरसा और परसवाड़ा विकासखंडों में युद्धस्तर पर चलाया जाएगा।
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