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ईडी ने आय से अधिक संपत्ति मामले में एनएफआर के इंजीनियर की तीन संपत्तियों को किया जब्त


गुवाहाटी, 9 मई (आईएएनएस)। गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के उप मुख्य अभियंता हेम चंद्र बोराह और उनकी पत्नी गायत्री सैकिया के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति से संबंधित एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत लगभग 65.60 लाख रुपए मूल्य की तीन अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। गायत्री गुवाहाटी के भास्कर विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय में सरकारी स्कूल शिक्षिका हैं।

गुवाहाटी, 9 मई (आईएएनएस)। गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के उप मुख्य अभियंता हेम चंद्र बोराह और उनकी पत्नी गायत्री सैकिया के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति से संबंधित एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत लगभग 65.60 लाख रुपए मूल्य की तीन अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। गायत्री गुवाहाटी के भास्कर विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय में सरकारी स्कूल शिक्षिका हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), एसी-आई, नई दिल्ली द्वारा हेम चंद्र बोराह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(ई) के तहत और गायत्री सैकिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 109 के साथ धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(ई) के तहत आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।

सीबीआई ने इसके बाद सक्षम न्यायालय के समक्ष दिनांक 25 मार्च 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया। सीबीआई के आरोपपत्र के विस्तृत विश्लेषण और पीएमएलए के तहत स्वतंत्र जांच के आधार पर ईडी की जांच से पता चला कि 1 अप्रैल 2016 से 17 जनवरी 2021 की अवधि के दौरान हेम चंद्र बोराह ने अपनी पत्नी गायत्री सैकिया के साथ मिलकर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक, लगभग 73.76 लाख रुपए की संपत्ति अर्जित की, जो उक्त अवधि के दौरान उनके सभी ज्ञात वैध स्रोतों से प्राप्त कुल आय का 86.88 प्रतिशत थी। जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने अपराध की आय को वैध बनाने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया था।

हेम चंद्र बोराह और गायत्री सैकिया के पास कुल सात बैंक खाते होने के बावजूद एटीएम और यूपीआई के माध्यम से उनकी कुल निकासी मात्र 1,36,894 रुपए थी। जांच में यह साबित हुआ कि आरोपियों ने रिश्वत के रूप में प्राप्त अवैध नकदी का इस्तेमाल अपने दैनिक घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए किया, जिससे उनका वैध वेतन बैंक खातों में सुरक्षित रहा। इसके बाद, इस संचित वेतन को चेक के माध्यम से अचल संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया, जिन्हें उन्होंने वैध संपत्ति के रूप में दिखाया। आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

एमएस/

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