
श्योपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित कूनो नेशनल पार्क से भारत के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' को हिलाकर रख देने वाला मामला सामने आया है। 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 में 19 महीने का नर चीता शावक KNG22 गंभीर रूप से लहूलुहान हालत में मिला था। प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण में शरीर के भीतर बाहरी धातु तत्व होने की पुष्टि होने के बाद उसे तत्काल एयरलिफ्ट कर जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया। वहां सीटी स्कैन में खुलासा हुआ कि छर्रों के कारण चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा था। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आपातकालीन सर्जरी कर उसके शरीर से गोलियों के पांच छर्रे बाहर निकाले, किंतु तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसने दम तोड़ दिया।
जांच में सामान्य वन्यजीव संघर्ष के बजाय अवैध गोलीबारी की पुष्टि होते ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरक्षा व्यवस्था में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में वन विभाग ने दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षकों सहित कुल छह कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, मुरैना पुलिस ने त्वरित सुराग जुटाते हुए मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से वारदात में प्रयुक्त अवैध हथियार भी बरामद कर लिए गए हैं। अब इस बिंदु पर गहन पड़ताल की जा रही है कि उच्च सुरक्षा वाले आरक्षित वन क्षेत्र में हथियारबंद शिकारी कैसे दाखिल हुए और ट्रैकिंग टीम को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
देश में लगभग 79 वर्षों के अंतराल के बाद किसी चीते की गोली मारकर हत्या का यह पहला मामला सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के वन्यजीव प्रबंधन तंत्र की साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ दल कूनो रवाना किया है, जबकि राज्य शासन ने वन एवं पुलिस अधिकारियों की संयुक्त विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। इधर, वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रकरण की सीबीआई (CBI) जांच कराने तथा कूनो के फील्ड डायरेक्टर और डीएफओ को पद से हटाने की मांग उठाते हुए सुरक्षा ऑडिट की वकालत की है।
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