
इंदौर जिले के मानपुर थाना क्षेत्र में आईएएस वंदना वैद्य के फार्म हाउस पर पकड़े गए बड़े जुआ अड्डे के मामले में पुलिस विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने इस कांड में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता और लापरवाही के चलते चार और पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही अब तक इस मामले में कुल सात पुलिसकर्मियों पर गाज गिर चुकी है।
पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी जगदीश कुबड़ा ने पूछताछ के दौरान चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कुबड़ा ने बताया कि पटेल पैलेस के मालिक महेंद्र पटेल ने उसे जुआ खिलाने के लिए सुरक्षित जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा किया था। महेंद्र पटेल ने यह भरोसा दिलाया था कि पुलिस से उसकी पूरी 'सेटिंग' है, इसलिए डरने की कोई बात नहीं है। इस सुरक्षा के बदले हर दिन 20 हजार रुपये देने की डील तय हुई थी। महेंद्र पटेल वर्तमान में फरार है और कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी है।
एसपी ने सोमवार को आरोपी कुबड़ा से हुई पूछताछ के बाद मंगलवार को मानपुर थाने के चार और कर्मचारियों पर कार्रवाई की। लाइन अटैच किए गए पुलिसकर्मियों में शामिल हैं:
उप निरीक्षक (SI) त्रिलोक बोरासी
सहायक उपनिरीक्षक (ASI) सुरेश भदौरिया
सहायक उपनिरीक्षक (ASI) नीलेश यादव
आरक्षक सुशांत
इससे पहले 11 मार्च को तत्कालीन थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोर, उप निरीक्षक मिथुन ओसारी और सहायक उप निरीक्षक रेशम गिरवाल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
जांच में सामने आया कि मानपुर के पटेल पैलेस और कोठी निवास फार्म हाउस जैसे इलाकों में जनवरी माह से लगातार जुआ अड्डा चलाया जा रहा था। कभी शाम को तो कभी पूरी रात बेखौफ होकर जुआ खिलाया जाता था। हैरानी की बात यह है कि जिस आवलीपुरा बीट की जिम्मेदारी एसआई मिथुन ओसारी की थी, वहां का सारा काम त्रिलोक बोरासी और अन्य कर्मचारी देखते थे, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया कि आरोपी जगदीश कुबड़ा को एक दिन की रिमांड के बाद मंगलवार को पुनः न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मुख्य सूत्रधार महेंद्र पटेल की तलाश में जुटी है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है क्योंकि जुआ अड्डा एक आईएएस अधिकारी के स्वामित्व वाले फार्म हाउस पर संचालित हो रहा था।
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