
तेहरान/वॉशिंगटन. मिडिल ईस्ट में चल रहे भीषण तनाव के बीच ईरान ने पहली बार दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने का प्रस्ताव दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि जब तक परमाणु कार्यक्रम पर ठोस समाधान नहीं होता, कोई समझौता नहीं होगा।
पाकिस्तान के जरिए भेजे गए इस नवीनतम प्रस्ताव में ईरान ने एक 'चरणबद्ध' योजना पेश की थी:
युद्ध विराम: अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष को तुरंत खत्म किया जाए और भविष्य में हमलों की गारंटी दी जाए।
ब्लॉकचेन और व्यापार: अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाए, जिससे होर्मुज का रास्ता खुले और ईरान का तेल व्यापार फिर से शुरू हो सके।
परमाणु मुद्दा: सबसे अंत में परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) जैसे जटिल विषयों पर चर्चा की जाए।
सीएनएन और फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान केवल 'टाइमिंग गेम' खेल रहा है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि अगर परमाणु मुद्दे को सुलझाए बिना होर्मुज खोल दिया गया, तो ईरान को आर्थिक मजबूती मिल जाएगी और वह बातचीत में हावी हो जाएगा।
विवाद की मुख्य जड़:
अमेरिका की मांग: ईरान कम से कम 20 साल तक अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह रोक दे और अपना 440 किलो समृद्ध यूयूरेनियम अमेरिका या किसी तीसरे पक्ष को सौंप दे।
ईरान का पुराना स्टैंड: ईरान केवल 5 साल की रोक और यूरेनियम के आधे हिस्से को रूस भेजने पर सहमत था, जिसे ट्रंप पहले ही 'अपर्याप्त' बता चुके हैं।
होर्मुज के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। ईरान की तेल भंडारण क्षमता (Storage Capacity) भी तेजी से खत्म हो रही है, यही कारण है कि वह जल्द से जल्द नाकेबंदी हटवाना चाहता है। लेकिन वॉशिंगटन फिलहाल "अधिकतम दबाव" (Maximum Pressure) की नीति पर अडिग है।
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