
वाशिंगटन/तेहरान/यरूशलेम। मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। शुक्रवार सुबह ईरान ने अपनी सैन्य पहुंच का प्रदर्शन करते हुए हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे 'डिएगो गार्सिया' को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के तट से लगभग 3,810 किलोमीटर दूर स्थित इस बेस तक मिसाइलें तो पहुँचीं, लेकिन वे अपने लक्ष्य को भेदने में नाकाम रहीं। इनमें से एक मिसाइल हवा में ही फेल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। यह हमला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसी बेस से अमेरिका अपने घातक बॉम्बर और टैंकर विमानों का संचालन करता है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध में सक्रिय सहयोग न देने पर अपने NATO सहयोगियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर तीखे प्रहार करते हुए NATO देशों को 'कायर' और 'कमजोर' करार दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी अकेले अमेरिका की नहीं है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अमेरिका के बिना यह गठबंधन सिर्फ एक 'कागजी शेर' है और वे सहयोगियों की इस बेरुखी को याद रखेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि आगामी 4 से 6 हफ्तों में ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर इस युद्ध को खत्म किया जा सकता है।
दूसरी ओर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फारसी नववर्ष 'नवरोज' के अवसर पर ईरान के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है। पुतिन ने ईरान को रूस का 'वफादार दोस्त' बताते हुए कहा कि मॉस्को हर कठिन परिस्थिति में तेहरान के साथ खड़ा रहेगा। रूस ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर किए गए ताज़ा हमलों की भी कड़ी निंदा की है। हालांकि, ईरानी परमाणु एजेंसी का दावा है कि नतांज पर हमले के बावजूद कोई रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ है और स्थिति नियंत्रण में है।
व्यापारिक मोर्चे पर, अमेरिका ने वैश्विक तेल बाजार में मची भारी उथल-पुथल को देखते हुए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। इस फैसले से भारत और अन्य एशियाई देशों की रिफाइनरियों को उन तेल खेपों को उतारने की अनुमति मिल गई है जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं। हालांकि, अमेरिका के भीतर ही डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, उनका तर्क है कि इससे ईरान को युद्ध जारी रखने के लिए पैसा मिलेगा।
जमीनी हकीकत की बात करें तो हिजबुल्लाह ने एक ही दिन में इजराइल पर रिकॉर्ड 55 हमले करने का दावा किया है, जिसके जवाब में इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह के कई लड़ाकों को मार गिराया है। ईरान के भीतर भी तनाव चरम पर है; राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में धमाकों की आवाजें सुनी जा रही हैं, जबकि मानवाधिकार समूहों का दावा है कि इस युद्ध में अब तक 3,000 से ज्यादा ईरानी लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
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