
बर्न/वॉशिंगटन। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच स्विट्जरलैंड ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लेते हुए अमेरिका को सैन्य हथियारों के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी है। स्विस सरकार ने अपनी ऐतिहासिक 'तटस्थता' (Neutrality) की नीति का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वह जंग में शामिल किसी भी पक्ष को युद्ध सामग्री की आपूर्ति नहीं करेगा। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए इसे एक बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब भविष्य में अमेरिकी सेना को स्विस हथियारों के लिए कोई भी नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
स्विस सरकार ने शुक्रवार (20 मार्च 2026) को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद से अमेरिका के लिए हथियारों के निर्यात का कोई नया परमिट जारी नहीं किया गया है। स्विट्जरलैंड ने साफ कर दिया है कि जब तक पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में संघर्ष जारी रहेगा, तब तक वह हथियार निर्यात को मंजूरी नहीं देगा। यह पहली बार नहीं है जब स्विट्जरलैंड ने ऐसा कड़ा रुख अपनाया हो; इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान भी स्विस सरकार ने अपनी हवाई सीमा के इस्तेमाल और हथियारों की आपूर्ति पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाए थे।
इस फैसले का सीधा असर अमेरिकी रक्षा तैयारियों पर पड़ सकता है। जहाँ एक ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से ईरान में जमीनी सेना न उतारने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रणनीतिक हलचल कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि 2,200 मरीन सैनिकों के साथ अमेरिकी युद्धपोत 'यूएसएस त्रिपोली' मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में स्विट्जरलैंड का 'नो-वेपन डील' वाला रुख ट्रंप की 'वॉर मशीन' के लिए बड़ी बाधा बन सकता है।
स्विट्जरलैंड ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह ऐसी किसी भी जंग का हिस्सा नहीं बनेगा जहाँ मानवता दांव पर लगी हो। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि डिफेंस सेक्टर के विशेषज्ञों का एक विशेष समूह अमेरिका को होने वाले हथियार निर्यात और वहां के ताजा घटनाक्रमों की लगातार समीक्षा करेगा। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों की धमकी देने वाले डोनाल्ड ट्रंप, स्विट्जरलैंड के इस साहसी फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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