
तेहरान/वॉशिंगटन/इस्लामाबाद. मध्य पूर्व (West Asia) में जारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने से साफ इनकार कर दिया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता नहीं खुलेगा.
होर्मुज पर ईरान की 'न' और नाकेबंदी का आरोप
ईरानी स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि सीजफायर के उल्लंघन के बीच होर्मुज को खोलना मुमकिन नहीं है. उन्होंने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
"अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों को निशाना बना रही है. यह न केवल ईरान के खिलाफ युद्ध है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की साजिश है. पूर्ण सीजफायर तभी होगा जब हमारे आर्थिक हितों पर लगी यह अवैध नाकेबंदी हटेगी."
गौरतलब है कि पिछले 24 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया है, जहाँ ईरानी बलों द्वारा कुछ जहाजों को रोकने और जब्त करने की खबरें भी सामने आई हैं.
पाकिस्तान की मध्यस्थता: क्या इस्लामाबाद में पिघलेगी बर्फ?
युद्ध के मुहाने पर खड़े दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए पाकिस्तान बड़ी भूमिका निभा रहा है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक:
कल होगी बैठक: शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच गुप्त वार्ता हो सकती है.
ट्रम्प का बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी संकेत दिए हैं कि वह बातचीत के पक्ष में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान आर्थिक रूप से दबाव में है और शांति वार्ता ही एकमात्र रास्ता है.
पाकिस्तान का रोल: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय पिछले कई दिनों से दोनों पक्षों के संपर्क में हैं ताकि एक स्थायी सीजफायर पर सहमति बन सके.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल
होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने से दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल आने की आशंका है. पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ईरान ने इस मार्ग पर समुद्री बारूद (Mines) बिछाया है, तो इसे पूरी तरह साफ करने में 6 महीने तक का समय लग सकता है.
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