
इस्लामाबाद / वाशिंगटन. पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही 21 घंटे की मैराथन बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ वापस रवाना हो गए हैं. इस वार्ता के बेनतीजा रहने के पीछे मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना रहा.
वार्ता विफल होने के मुख्य कारण
परमाणु हथियार पर अड़ा अमेरिका: जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को पूर्ण आश्वासन चाहिए कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही भविष्य में ऐसी कोई तैयारी करेगा. अमेरिका का कहना है कि समझौता न होना ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह है.
ईरान का पक्ष: ईरानी प्रतिनिधियों ने ट्रंप प्रशासन (वेंस) की शर्तों को "अत्यधिक सख्त" करार दिया. उनका मानना है कि ये शर्तें ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा समझौतों के अनुकूल नहीं हैं.
होर्मुज स्ट्रेट का संकट: ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री सुरंगों (Mines) को लेकर गतिरोध बना हुआ है. अमेरिका ने इन सुरंगों को हटाने के लिए अपना सैन्य अभियान (CENTCOM) पहले ही तेज कर दिया है.
क्षेत्रीय तनाव और अन्य बड़े अपडेट
इजराइल की चेतावनी: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी थमी नहीं है. उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों ने ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है.
गालिबाफ का भावुक संदेश: ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ मारे गए बच्चों की तस्वीरें लेकर इस्लामाबाद पहुँचे, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के खिलाफ सहानुभूति जुटाना था.
लेबनान में हिंसा: कूटनीतिक प्रयासों के बीच लेबनान के तुफाहता इलाके में बमबारी जारी है, जिसमें कई नागरिकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है.
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