जबलपुर, डी-कंपोज शवों से तीखी बदबू, फ्लाइट उड़ाने से इंकार
जबलपुर। बरगी बांध में हुए
क्रूज हादसे में मृतकों के शव
डी-कंपोज हो गए। दो शवों की हालत बेहद खराब हो गई थी, जिनमें से इतनी
तीखी बदबू आने लगी कि
फ्लाइट ऑपरेटर ने उड़ान भरने से ही इंकार कर दिया। राज्य सरकार ने
आर्डनेंस फैक्ट्री के कर्मचारी कामराज और उनके बेटे
श्रीतमिल का शव
तमिलनाडू भेजने की व्यवस्था की थी, लेकिन तेज बदबू की वजह से
चार्टेड प्लेन उड़ान भरने को तैयार नहीं हुआ।
कैसे हुआ हादसा?
30 अप्रैल 2026 को एमपी टूरिज्म का क्रूज बरगी बांध में डूब गया था। हादसे में 28 पर्यटकों को किसी तरह बचा लिया गया, पर 13 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 8 महिलाएं और 4 बच्चे हैं। खराब मौसम के कारण क्रूज हादसे का शिकार हुआ। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कई लापरवाहियां भी सामने आई हैं।
कामराज परिवार की त्रासदी
हादसे में आर्डनेंस फैक्ट्री के कामराज आर सहित परिवार के 3 लोगों की मौत हुई। उनकी पत्नी और 5 साल के बेटे श्रीतमिल की भी जान चली गई। कामराज मूलतः तमिलनाडु के त्रिचि के निवासी थे। ऐसे में सरकार ने उनका और बेटे का शव वहां भिजवाने के लिए चार्टेड प्लेन हायर किया।
फ्लाइट ऑपरेटर ने किया मना
सोमवार (4 मई 2026) को जैसे ही विमान में पिता-पुत्र के शव रखे गए, फ्लाइट ऑपरेटर ने उड़ान भरने से साफ मना कर दिया। उसने कहा कि शव बुरी तरह खराब हो चुके हैं, इनमें से तेज बदबू आ रही है। यात्रियों और क्रू के लिए यह स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है।
अधिकारियों की मशक्कत
यह जानकारी मिलते ही कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तुरंत कार्रवाई की:
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रांझी एसडीएम मोनिका वाघमारे और तहसीलदार आदर्श जैन को जबलपुर एयरपोर्ट भेजा
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दोनों अधिकारियों ने शवों पर खूब स्प्रे छिड़काया
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कॉफिन की दोबारा अच्छे से टेपिंग की गई
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फ्लाइट ऑपरेटर को मनाने की कोशिश की
इन सब प्रयासों के बाद ही फ्लाइट ऑपरेटर त्रिची के लिए उड़ान भरने पर राजी हुआ। पिता-पुत्र के शवों के साथ फ्लाइट जबलपुर एयरपोर्ट से करीब 9 बजे रवाना हुई।
बड़े सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है:
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क्या शवों को समय पर पोस्टमार्टम और संरक्षण नहीं किया गया?
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क्या बरगी बांध में बचाव अभियान में देरी हुई?
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क्या क्रूज संचालकों की लापरवाही के कारण 13 लोगों की जान गई?
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क्या मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा मिलेगा?
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