
जबलपुर शहर अंतर्गत गढ़ा थाना क्षेत्र के संजीवनी नगर में गुरुवार रात एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है। शराब दुकान के सामने तेज रफ्तार से आ रहे एक अनियंत्रित डंपर ने स्कूटी सवार युवती को जोरदार टक्कर मार दी। भिड़ंत इतनी भयावह थी कि युवती उछलकर सीधे सड़क पर सिर के बल जा गिरी, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी व बाहरी चोटें आईं। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद मौके से फरार हुए डंपर चालक को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया है।
गढ़ा थाना प्रभारी प्रसन्न कुमार शर्मा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजीवनी नगर निवासी दीक्षा गुप्ता अपनी स्कूटी (क्रमांक एमपी 20 एसएल 2811) पर सवार होकर गुरुवार देर रात अपने घर लौट रही थी। वह जैसे ही संजीवनी नगर स्थित शराब दुकान के सामने मुख्य मार्ग पर पहुंची, तभी सामने से आ रहे एक बिना नंबर वाले भारी डंपर ने उसकी स्कूटी को सीधी टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर लगते ही युवती काफी दूर छिटक गई और उसका सिर सड़क से टकरा गया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।
घटना के तुरंत बाद मौके पर राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। नागरिकों ने बिना वक्त गंवाए घायल युवती को निजी वाहन से नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलते ही गढ़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई शुरू की।
हादसे के बाद डंपर चालक वाहन को सड़क पर ही लावारिस छोड़कर भाग निकला था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नाकेबंदी की और कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी चालक राकेश झारिया को हिरासत में ले लिया। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि डंपर उखरी से मानेगांव की ओर गिट्टी लोड करने जा रहा था। पुलिस ने बिना नंबर प्लेट वाले डंपर को जब्त कर लिया है और आरोपी चालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित मोटर व्हीकल एक्ट की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
संजीवनी नगर जैसे घनी आबादी और व्यस्त रिहायशी इलाके में तेज गति से दौड़ रहे भारी डंपर के कारण हुई इस मौजूं मौत ने एक बार फिर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि शहर के भीतर प्रतिबंधित समय में भी भारी और बिना नंबर वाले डंपर बेखौफ रफ्तार से दौड़ते हैं, जिन पर पुलिस व आरटीओ प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है। लोगों ने रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्त समय-सीमा तय करने और नियमित जांच की मांग की है।
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