
जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री देश के अर्धसैनिक बलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष वाटर बाउजर वाहन तैयार करने जा रही है। ‘शक्तिमान’ चेसिस पर आधारित यह वाहन दुर्गम इलाकों में पानी पहुंचाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दंगा नियंत्रण और आग बुझाने जैसे कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना के तहत 52 वाहनों की पहली खेप तैयार करने की योजना है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसके उत्पादन के लिए रक्षा मंत्रालय से आदेश मिल चुका है।
इस परियोजना की खासियत यह है कि वाहन को ऐसे इलाकों में काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां सामान्य वाहनों की आवाजाही मुश्किल होती है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जंगलों से लेकर राजस्थान के रेतीले क्षेत्रों तक, यह वाटर बाउजर सुरक्षा बलों की परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।
नए वाटर बाउजर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पानी ढोने की क्षमता है। वाहन में अधिकतम 12,000 लीटर पानी रखने की व्यवस्था होगी। इसमें स्टेनलेस स्टील 304 ग्रेड का टैंक इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि जंग लगने की समस्या कम हो और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिले।
टैंक के भीतर फूड-ग्रेड एपॉक्सी कोटिंग भी दी जाएगी। इसके अलावा, वाहन में पानी शुद्ध करने की इकाई लगाने की व्यवस्था है, जिससे जरूरत के मुताबिक पानी को उपयोग के योग्य बनाने में सहायता मिलेगी। दूरदराज के इलाकों में तैनात जवानों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जहां नियमित जलापूर्ति चुनौतीपूर्ण रहती है।
यह वाहन केवल पानी की ढुलाई के लिए नहीं बनाया जा रहा है। इसमें हाई-प्रेशर वाटर मॉनिटर लगाया जाएगा, जो करीब 60 मीटर तक पानी की तेज धार पहुंचाने में सक्षम होगा।
इस प्रणाली का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार दंगा नियंत्रण और जंगलों में आग बुझाने जैसे कार्यों में किया जा सकता है। इसके लिए जेट, स्प्रे और फॉग जैसे तीन अलग-अलग नोजल मोड दिए जाने की जानकारी है। इन विकल्पों से पानी की धार को परिस्थिति के हिसाब से इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
इस तरह एक ही वाहन को कई तरह की परिचालन जरूरतों के अनुरूप उपयोग किया जा सकेगा। हालांकि, इसका वास्तविक उपयोग संबंधित सुरक्षा बलों के दिशा-निर्देशों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार होगा।
व्हीकल फैक्ट्री इस वाटर बाउजर को 4x4 और 6x6 कॉन्फिगरेशन में तैयार कर रही है। इन दोनों विकल्पों का उद्देश्य अलग-अलग तरह के रास्तों और परिचालन परिस्थितियों में वाहन की उपयोगिता बढ़ाना है।
वाहन में लगभग 380 मिलीमीटर का ग्राउंड क्लीयरेंस रखा गया है, जिससे ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने में मदद मिलेगी। इसके साथ सेंट्रल टायर इंफ्लेशन सिस्टम भी दिया जाएगा। इस तकनीक के जरिए चालक केबिन से ही टायरों में हवा का दबाव जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा कर सकेगा।
रेतीली जमीन, कीचड़ और कठिन रास्तों पर टायर का दबाव समायोजित करने से वाहन की आवाजाही में सहायता मिल सकती है। यही वजह है कि इसे रेगिस्तानी क्षेत्रों के साथ जंगलों और दुर्गम इलाकों में इस्तेमाल के लिहाज से तैयार किया जा रहा है।
दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन में बख्तरबंद केबिन का प्रावधान किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका उद्देश्य छोटे हथियारों की गोलीबारी और सीमित स्तर के विस्फोटों से सुरक्षा प्रदान करना है।
हालांकि, वाहन की वास्तविक सुरक्षा क्षमता का आकलन उसके निर्धारित परीक्षण मानकों और प्रमाणित सुरक्षा स्तर के आधार पर ही किया जाना चाहिए। केवल बख्तरबंद केबिन होने से हर प्रकार के हमले से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
व्हीकल फैक्ट्री से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस वाहन के प्रोटोटाइप का कठिन मौसम में परीक्षण किया गया। दावा है कि वाहन ने माइनस 45 डिग्री सेल्सियस से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान वाली परिस्थितियों में लगभग 2,000 किलोमीटर की दूरी तय की और इस दौरान कोई खराबी दर्ज नहीं हुई।
यदि उत्पादन के दौरान वाहन निर्धारित गुणवत्ता और परीक्षण मानकों पर खरा उतरता है, तो इससे अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रोटोटाइप परीक्षण के नतीजों और बड़े पैमाने पर तैयार होने वाले वाहनों के प्रदर्शन में अंतर हो सकता है।
योजना के तहत वाटर बाउजर की पहली खेप में 52 वाहन शामिल होंगे। इन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) जैसे अर्धसैनिक बलों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
इन बलों की तैनाती देश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में होती है। कई स्थानों पर पानी की उपलब्धता, कठिन रास्ते और प्रतिकूल मौसम चुनौती बन जाते हैं। ऐसे में अधिक क्षमता वाला वाटर बाउजर रसद व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार हो सकता है।
जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री पहले भी सैन्य उपयोग के लिए विभिन्न श्रेणियों के वाहनों का निर्माण करती रही है। इनमें 5 टन और 2.5 टन क्षमता वाले शक्तिमान वाहन, LPTA 715 और बुलेटप्रूफ वाहन शामिल हैं।
नए वाटर बाउजर का निर्माण स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और पहल माना जा रहा है। घरेलू स्तर पर ऐसे विशेष वाहनों का निर्माण होने से देश की औद्योगिक क्षमताओं को मजबूती मिल सकती है। इसके साथ ही उत्पादन से जुड़े स्थानीय उद्योगों और श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी रहती है।
जबलपुर लंबे समय से रक्षा उत्पादन से जुड़े संस्थानों के कारण औद्योगिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। शक्तिमान चेसिस पर आधारित इस नए वाटर बाउजर की परियोजना से शहर की रक्षा निर्माण क्षमता को एक और पहचान मिलने की उम्मीद है।
12 हजार लीटर तक पानी ले जाने की क्षमता, कठिन रास्तों पर चलने की तकनीक, हाई-प्रेशर वाटर मॉनिटर और सुरक्षा संबंधी सुविधाओं से लैस यह वाहन अर्धसैनिक बलों के लिए बहुउपयोगी साबित हो सकता है।
अब इस परियोजना के उत्पादन कार्यक्रम, परीक्षण मानकों और संबंधित बलों को वाहनों की आपूर्ति पर नजर रहेगी। यदि योजना तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो जबलपुर में निर्मित यह वाटर बाउजर देश के विभिन्न संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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