
नई दिल्ली. मिडिल-ईस्ट संकट और वैश्विक अस्थिरता का सबसे बड़ा प्रहार अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर हुआ है. सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अप्रैल 2026 के लिए जारी नई दरों के अनुसार, विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की कीमतों में 115% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है. इतिहास में पहली बार घरेलू उड़ानों के लिए जेट ईंधन का दाम 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार निकल गया है.
महानगरों में आसमान छूती कीमतें
रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की किल्लत ने एयरलाइंस की कमर तोड़ दी है. दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट पर जेट फ्यूल की कीमत पिछले महीने के 96,638 से सीधे उछलकर 2,07,341 प्रति किलोलीटर हो गई है.
मुंबई: यहाँ कीमतें 90,451 से बढ़कर 1,94,968 हो गई हैं.
कोलकाता और चेन्नई: इन शहरों में भी ईंधन की दरें 2 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानें: विदेशी उड़ानों के लिए ईंधन पहली बार 1690 डॉलर प्रति किलोलीटर (दिल्ली) तक पहुंच गया है.
आम आदमी की जेब पर कितना बोझ?
किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में ईंधन की हिस्सेदारी 40 से 45 प्रतिशत होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन के दामों में 100% से ज्यादा का उछाल आने के बाद एयरलाइंस के पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकटों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की तत्काल बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
रुपये की गिरावट ने बढ़ाई मुश्किल
एक तरफ ईंधन महंगा हुआ है, तो दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. वर्तमान में एक डॉलर की कीमत 95 के पार जा चुकी है, जिससे विमानों के कलपुर्जे और लीज रेंट चुकाना एयरलाइंस के लिए और भी महंगा हो गया है.
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