
भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने प्रदेश के 30वें चीफ जस्टिस के रूप में आधिकारिक पदभार संभाल लिया है। राजधानी भोपाल स्थित राजभवन में आयोजित गरिमामय शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधि व विधायी कार्य विभाग सहित कई कैबिनेट मंत्री, शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव-नियुक्त मुख्य न्यायाधीश को बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
16 जुलाई 1969 को जन्मे चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का कानूनी सफर बेहद समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने बीएससी (केमिस्ट्री) करने के बाद वर्ष 1993 में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री पूरी की और उसी वर्ष से गुजरात बार में नियमित वकालत शुरू की। उनकी निष्पक्ष कार्यप्रणाली और विधिक मामलों पर गहरी पकड़ को देखते हुए उन्हें 2001 में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और 2002 में एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त किया गया था। 6 अप्रैल 2016 को उन्हें गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने से पहले वे गुजरात हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायाधीश के तौर पर आपराधिक न्याय प्रणाली और प्रशासनिक निष्पक्षता से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले दे चुके हैं।
संविधान के तहत उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति महामहिम राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीशों की कॉलेजियम प्रणाली के जरिए संपन्न होती है। कॉलेजियम द्वारा वरिष्ठता, सत्यनिष्ठा और विधिक दक्षता का समग्र मूल्यांकन कर केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय को नामों की सिफारिश भेजी जाती है। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की औपचारिक सहमति और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाती है। संविधान के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए न्यूनतम 10 वर्षों तक न्यायिक पद पर कार्य करने अथवा किसी हाईकोर्ट में लगातार 10 वर्षों तक वकालत करने का अनुभव अनिवार्य है।
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