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कशिश वारसी ने रामपुर पुलिस अधीक्षक की टिप्पणी की निंदा की, गाय के सम्मान करने की अपील


मुरादाबाद, 7 अगस्त (आईएएनएस)। रामपुर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह सिसोदिया के बयान पर सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशिश वारसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुसलमान गोहत्या करता है तो वह उसका विरोध करेंगे। उन्होंने एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा कथित रूप से इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की भी कड़ी निंदा की और सभी से संयमित एवं सम्मानजनक भाषा के प्रयोग की अपील की।

मुरादाबाद, 7 अगस्त (आईएएनएस)। रामपुर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह सिसोदिया के बयान पर सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशिश वारसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुसलमान गोहत्या करता है तो वह उसका विरोध करेंगे। उन्होंने एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा कथित रूप से इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की भी कड़ी निंदा की और सभी से संयमित एवं सम्मानजनक भाषा के प्रयोग की अपील की।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कशिश वारसी ने कहा कि जहां तक गोहत्या का मामला है, यदि कोई भी मुसलमान गोहत्या करता है तो वह उसकी मुखालफत करेंगे। सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते वह यह कहना चाहते हैं कि उनके अनुसार हजरत मोहम्मद ने गाय के गोश्त से परहेज करने की बात कही है। यदि कोई मुसलमान गोहत्या कर रहा है तो वह अपने नबी की भी मुखालफत कर रहा है।

उन्होंने देश के मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि जब हिंदू समाज की गाय के प्रति गहरी आस्था है, तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

कशिश वारसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति अशोभनीय या आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करता है तो उसकी भी निंदा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की ओर से कथित तौर पर ऐसा आपत्तिजनक जुमला बोला गया। उन्हें इस घटना पर सख्त अफसोस है और वह इसकी निंदा करते हैं। सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की भाषा मर्यादित और जिम्मेदार होनी चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे ऐसी भाषा का प्रयोग न करें, जिससे किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे। सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान बनाए रखने के लिए संवाद की भाषा शालीन और संवेदनशील होनी चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

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