
कोट्टायम: केरल हाईकोर्ट ने एक दंपती को 31 हफ्ते से अधिक समय के भ्रूण का चिकित्सकीय गर्भपात (Medical Termination of Pregnancy - MTP) कराने की अनुमति दी है। यह फैसला उस समय आया जब भ्रूण में मस्तिष्क और सिर से जुड़ी गंभीर जन्मजात विकृतियाँ पाई गईं, जो जीवनभर गंभीर शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ पैदा कर सकती थीं।
कोर्ट ने जस्टिस शोभा अन्नम्मा ईप्पन की अध्यक्षता में यह आदेश देते हुए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को आधार बनाया। मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में बताया कि यदि गर्भावस्था जारी रहती है, तो महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और बच्चे का जन्म गंभीर शारीरिक विकृतियों के साथ होगा।
कोर्ट ने कहा कि यदि गर्भपात की अनुमति नहीं दी जाती है, तो इससे केवल देरी होगी और परिवार की मानसिक और शारीरिक पीड़ा बढ़ेगी। इसके बाद कोर्ट ने कोट्टायम मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिए कि वे तुरंत एक मेडिकल टीम गठित करें और सर्वोत्तम चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाकर गर्भपात कराएँ।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि गर्भपात से पहले अंतिम स्कैन कर भ्रूण की विकृतियों की दोबारा पुष्टि की जाए। यदि भ्रूण जीवित जन्म लेता है, तो अस्पताल उसे सभी आवश्यक मेडिकल सहायता प्रदान करेगा, जिसमें इन्क्यूबेशन और सुपर-स्पेशलिटी इलाज शामिल है। साथ ही, दंपती बच्चे की देखभाल और इलाज का खर्च स्वयं वहन करेंगे।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि भ्रूण में माइक्रोसेफली जैसी गंभीर जन्मजात विकृतियाँ पाई गई हैं, जिनसे जीवनभर रहने वाली शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल विकलांगता होने की संभावना बहुत अधिक है।
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