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मध्य प्रदेश में एपीके और ई-सिम घोटाले में शामिल अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़


भोपाल/नर्मदापुरम, 12 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइलों और ई-सिम स्वैपिंग के माध्यम से बैंक खातों से पैसे चुरा रहा था।

भोपाल/नर्मदापुरम, 12 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइलों और ई-सिम स्वैपिंग के माध्यम से बैंक खातों से पैसे चुरा रहा था।

पुलिस ने बताया कि झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर निवासी उमेश दास (30) और उत्तम कुमार दास (23) को 7 मई को गिरफ्तार किया गया और 11 मई को मध्य प्रदेश लाया गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर नर्मदापुरम जिले के एक ग्रामीण के मोबाइल फोन की रिमोट एक्सेस प्राप्त करके और ई-सिम एक्टिवेशन के माध्यम से बैंकिंग अलर्ट और वन-टाइम पासवर्ड को डायवर्ट करके 3,09,917 रुपए की धोखाधड़ी की।

बानाखेड़ी पुलिस थाना क्षेत्र के डूमर गांव निवासी छोटेलाल कुशवाह (45) द्वारा 17 मार्च को शिकायत दर्ज कराने के बाद यह मामला सामने आया। शिकायत में उन्होंने कहा कि उनके बैंक खाते से धोखाधड़ी करके ऑनलाइन पैसे निकाल लिए गए हैं।

शिकायत के बाद, नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस. थोटा की देखरेख में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया।

पुलिस ने बताया कि तकनीकी जांच के बाद दल झारखंड पहुंचा, जहां अधिकारी 2 मई को पहुंचे और लगातार चार दिनों तक निगरानी करने के बाद 7 मई की देर रात छापेमारी के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया।

साइबर विभाग के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को भोपाल में प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि अत्यंत सतर्क रहते हुए और गुप्त रूप से काम करते हुए, पुलिस दल ने भेष बदलकर लगातार चार दिनों तक आरोपी के आवासीय क्षेत्र में निगरानी रखी।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग एप्लिकेशन के माध्यम से एपीके फाइलें भेजते थे।

पीड़ितों द्वारा फाइलें इंस्टॉल करने और अनुमति देने के बाद, जालसाजों को उनके मोबाइल फोन में संग्रहीत एसएमएस संदेशों, एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड, बैंकिंग अलर्ट, संपर्क सूचियों और अन्य डेटा तक पहुंच प्राप्त हो जाती थी।

पुलिस ने बताया कि गिरोह बाद में पीड़ितों के मोबाइल नंबरों से जुड़े ई-सिम जेनरेट करता था, जिससे एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड और बैंकिंग अलर्ट आरोपियों को भेजे जाते थे।

पुलिस ने कहा कि इसके बाद, आरोपी पीड़ित के मोबाइल नंबर के लिए एक ई-सिम जेनरेट करते थे, जिससे बैंक खाते से जुड़े एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड और बैंकिंग अलर्ट सीधे उन्हें भेजे जाते थे।

आरोपी से कथित तौर पर अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक जब्त कर लिए गए हैं।

पुलिस ने लोगों को अज्ञात स्रोतों से प्राप्त एपीके फाइलें इंस्टॉल न करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी है।

नागरिकों से यह भी कहा गया है कि यदि मोबाइल नेटवर्क अचानक काम करना बंद कर दे या उन्हें अनधिकृत ई-सिम एक्टिवेशन अलर्ट प्राप्त हों, तो तुरंत बैंकों और मोबाइल ऑपरेटरों से संपर्क करें।

--आईएएनएस

एमएस/

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