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मध्यप्रदेश ध्यान महायज्ञ: श्वास के माध्यम से आंतरिक शांति की खोज, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ दूसरा दिन

जबलपुर में आयोजित तीन दिवसीय मध्यप्रदेश ध्यान महायज्ञ के द्वितीय दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। दिनभर चले सत्रों में बड़ी संख्या में साधकों ने सहभागिता की और ध्यान, आत्मचिंतन तथा आध्यात्मिक ज्ञान के विभिन्न आयामों का अनुभव किया।

प्रातःकालीन सत्र में आयोजित एस्ट्रल हीलिंग एवं सर्जरी ध्यान विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें 700 से अधिक साधकों ने भाग लिया। इस सत्र में संचालन ध्यान रत्न पी वी राम राजू एवं सीनियर मास्टर शंपा मुखर्जी ने किया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को गहन शांति और आंतरिक ऊर्जा का अनुभव कराया।

तत्पश्चात सोल प्लान एवं एगो प्लान विषय पर  छत्तीसगढ़ भिलाई से आई सीनियर मास्टर सुवर्णा सुवि ने अपने विचार रखे। पी वी राम राजू जी ने पत्री जी के कॉन्सेप्ट्स एवं पुस्तक अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। तेलंगाना से सीनियर मास्टर रागिनी सेल्वराज ने  Parenting Redefined तथा “Who am I?” जैसे विषयों पर गहन विचार रखे। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को जीवन के उद्देश्य, आत्म-जागरूकता और सही निर्णय लेने की दिशा में नई दृष्टि प्रदान की।
फिर मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में ध्यान के प्रोजेक्ट्स एवं प्रचार की जानकारी साझा की गई। भोजनावकाश के बाद है हच सी जैन जी ने हू ई एम विषय पर अपने विचार रखे। 
आनापानसति ध्यान सत्र में साधकों ने श्वास के माध्यम से ध्यान की गहराई का अनुभव किया, वहीं “Death” विषय पर हुए सत्र में शंपा मुखर्जी ने जीवन और मृत्यु के रहस्यों को सरल एवं सहज रूप में समझाया।

संध्याकालीन सत्र में “Power of Thoughts” four types of thoughts  विषय पर दिल्ली से पीएमसी हिंदी की डायरेक्टर अमूल्य शास्त्रीजी ने अपने विचार साझा करते हुए मन के विभिन्न प्रकार के विचारों की शक्ति को समझाया गया। साथ ही पीएमसी के प्रोजेक्ट्स के माध्यम से संगठन की विभिन्न गतिविधियों और सामाजिक योगदान की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे दिन के आध्यात्मिक वातावरण को और भी ऊर्जावान बना दिया।

द्वितीय दिवस में 700 से अधिक प्रतिभागियों को ध्यान के माध्यम से आत्मविकास, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवन दृष्टि की ओर प्रेरित किया।

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