
भोपाल. मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर अत्यंत आक्रामक और रौद्र रूप धारण कर लिया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के अधिकांश जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं, और निचले इलाकों में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। मौसम विभाग ने गंभीर स्थिति को देखते हुए आगामी 48 घंटों के लिए प्रदेश के 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के चलते बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम पूरी तरह मुस्तैद हो गई है।
मौसम के इस तीव्र मिज के कारण कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं। चित्रकूट में ऐतिहासिक मंदाकिनी नदी उफान पर है, जबकि मंडला क्षेत्र में मां नर्मदा का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ रहा है। इसके अलावा छतरपुर, पन्ना, मैहर और दमोह जिलों में भी बारिश का प्रभाव काफी अधिक देखा जा रहा है। जलस्तर बढ़ने और बांधों का जलस्तर क्षमता के करीब पहुंचने के बाद एहतियातन कदम उठाते हुए जबलपुर के बरगी बांध और छतरपुर के कुटनी बांध के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी का खतरा और अधिक बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने एक प्रभावी निम्न दबाव क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के कारण राज्य में मानसूनी गतिविधियां बेहद तेज हो गई हैं। राजगढ़, नर्मदापुरम, गुना, शिवपुरी, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में अति भारी बारिश का विशेष अलर्ट है। इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बैतूल, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा और पन्ना में भी मूसलाधार बारिश की आशंका जताई गई है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 3 से 5 सितंबर के दौरान राज्यभर में बारिश का यह दौर यूं ही बना रहेगा, जिसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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