Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

पन्ना में विस्थापितों का 'चिता आंदोलन': मझगांय बांध में घर डूबने पर चिता पर लेटे सैकड़ों आदिवासी


पन्ना जिले अंतर्गत अजयगढ़ तहसील में मझगांय डैम के विस्थापित आदिवासियों ने शनिवार से एक बार फिर अपने हक और उचित मुआवजे की मांग को लेकर उग्र 'चिता आंदोलन' शुरू कर दिया है। बांध में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण विस्थापितों के मकान डूब क्षेत्र में आ गए हैं और कई बस्तियां चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो चुकी हैं। इसके बावजूद विस्थापित परिवारों को न तो अब तक उचित मुआवजा मिला है और न ही व्यवस्थित पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। इस प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित होकर ग्राम बहनरी टपरियन में सैकड़ों आदिवासियों ने लकड़ियों की चिता सजाकर उस पर लेटते हुए सत्याग्रह का आगाज किया।

केन-बेतवा लिंक, मझगांय और रुंझ बांध के प्रभावित एक मंच पर

ग्राम बहनरी टपरियन में शुरू हुए इस संयुक्त आंदोलन में क्षेत्र की तीन प्रमुख जल परियोजनाओं—केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय डैम और रुंझ बांध—के विस्थापित किसान व आदिवासी एकजुट हो गए हैं। आंदोलन का नेतृत्व 'जय किसान संगठन' के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पन्ना जिला प्रशासन पर संवेदनहीनता, तानाशाही और भारी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

'सिर्फ गांव नहीं, संविधान और मानवता भी डूब रही है': अमित भटनागर

आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने व्यवस्था पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने कहा कि:

  • विस्थापितों के साथ अन्याय: जिन गरीब और आदिवासी परिवारों के त्याग व पुश्तैनी जमीनों पर विकास की बड़ी-बड़ी परियोजनाएं खड़ी की जा रही हैं, आज उन्हीं को जलसमाधि लेने पर मजबूर किया जा रहा है।

  • मुआवजे के नाम पर रिश्वतखोरी: विस्थापितों के घरों में पानी घुस रहा है, लेकिन अधिकारी मुआवजे और पुनर्वास की फाइलें दबाए बैठे हैं। केन-बेतवा परियोजना में लोकायुक्त द्वारा पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद भी मैदानी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है।

  • पन्ना प्रशासन की उपेक्षा: पड़ोसी जिले छतरपुर में प्रशासनिक स्तर पर विस्थापितों की समस्याएं सुनकर राहत पहुंचाने की पहल हो रही है, लेकिन पन्ना जिला प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।

आंदोलन से अनभिज्ञ दिखा पुलिस-प्रशासनिक अमला

एक ओर जहां सैकड़ों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष जान जोखिम में डालकर चिता पर लेटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस प्रशासन की बेरुखी भी उजागर हुई है। इस संबंध में जब अजयगढ़ एसडीओपी (SDOP) राजीव सिंह भदोरिया से मीडिया ने संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि शनिवार से शुरू हुए इस चिता आंदोलन के बारे में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है और वे मामले का पता लगवा रहे हैं।

विस्थापित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रत्येक प्रभावित परिवार को सर्वे के अनुसार उचित मुआवजा राशि और सुरक्षित पुनर्वास स्थल आवंटित नहीं किया जाता, तब तक यह चिता आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

Date & Time : 2026-09-13 07:23:41

Share:

Leave A Reviews

Related News