
सीहोर जिला मुख्यालय के समीप काहिरी डेम स्थित ग्राम लसूडिया खास में नगरपालिका के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में दो दिन के भीतर दो बार क्लोरीन गैस रिसाव होने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। जहरीली गैस की चपेट में आने से छह माह की दुधमुंही बच्ची समेत दर्जनों ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई। पीड़ितों को चक्कर आना, दम घुटना, तेज खांसी, त्वचा में एलर्जी और आंखों में तेज जलन की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, गैस के तीखे प्रभाव से आसपास के पेड़-पौधे और कई एकड़ में खड़ी खरीफ फसलें झुलस गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गैस रिसाव की पहली घटना 8 सितंबर की रात को हुई थी, जब प्लांट में रखे एक सिलेंडर से रिसाव के बाद अफरा-तफरी मची। नगरपालिका ने तब स्थिति सामान्य होने और सिलेंडर को सुरक्षित ट्रीट करने का दावा किया था।
इसके बावजूद 10 सितंबर की रात को प्लांट के सामने से गुजर रहे राहगीरों और आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोगों की तबीयत दोबारा बिगड़ने लगी:
बीमार ग्रामीण: प्रेमजी, अनमोल, रामसभा बाई, केसर सिंह, प्रेम सिंह, अभिषेक, रीना, वैष्णवी, राकेश और मयंक सहित कई लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए।
अस्पताल में भर्ती: कई ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि दो ग्रामीणों का सीहोर जिला अस्पताल में सघन उपचार चल रहा है।
मासूम भी शिकार: ग्रामीण रामसभा बाई ने बताया कि उनकी 6 माह की पोती और बेटी अनमोल को लगातार आ रही तेज खांसी और सांस लेने में तकलीफ के चलते तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा।
ग्रामीणों ने नगरपालिका प्रशासन पर घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाया है। स्थानीय युवक अभिषेक मालवीय का कहना है कि 10 सितंबर को जब लीकेज सिलेंडर का ट्रीटमेंट किया जा रहा था, तब प्रशासन ने ग्रामीणों को कोई पूर्व चेतावनी या सूचना नहीं दी। आरोप है कि नगरपालिका की टीम ने लीकेज सिलेंडर को खुले में पानी के एक गड्ढे में डाल दिया, जिससे गैस का रिसाव और तेजी से हवा में घुल गया। यदि पहले से मुनादी या सूचना दी जाती, तो लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाते।
क्लोरीन गैस के फैलाव का असर आसपास के कृषि रकबे पर भी साफ देखा जा रहा है:
झुलसी फसलें: रासायनिक प्रभाव के कारण कई एकड़ में खड़ी सोयाबीन, तुवर (अरहर) और मक्का की पत्तियां काली पड़कर झुलस गई हैं।
लाखों के नुकसान का दावा: किसान रमेश ने बताया कि उनके आधा एकड़ में लगी सोयाबीन और तुवर पूरी तरह बर्बाद हो गई है। वहीं किसान राकेश ने मक्का की फसल नष्ट होने पर नगरपालिका प्रशासन से स्थलीय सर्वे कराकर उचित आर्थिक मुआवजे की मांग की है।
घटना के बाद यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि काहिरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में करीब 600-600 लीटर क्षमता वाले तीन क्लोरीन गैस सिलेंडर पिछले लगभग 10 वर्षों से अनुपयोगी और जर्जर हालत में पड़े हुए थे। वर्षों से इनके सुरक्षित निस्तारण पर ध्यान नहीं दिया गया।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए नगरपालिका सीहोर ने नागदा (उज्जैन) स्थित ग्रासिम केमिकल इंडस्ट्रीज की तकनीकी टीम से संपर्क साधा। गुरुवार को पहुंची विशेषज्ञ टीम ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए तीनों ट्रीटमेंट प्लांटों से 6 जोखिमभरे सिलेंडरों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला। सीहोर नगरपालिका सीएमओ सुधीर सिंह ने बताया कि ग्रासिम की तकनीकी टीम इन सभी खाली और जोखिमभरे सिलेंडरों को सुरक्षित तरीके से अपने साथ ले गई है और वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
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