
भोपाल. मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर नया विवाद सामने आया है। प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग और भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों में 21 लाख से अधिक मतदाताओं का अंतर दर्ज किया गया है। इस अंतर को लेकर राजनीतिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने तय किया है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) के बाद जारी होने वाली मतदाता सूची से अपनी सूची का मिलान किया जाएगा। इसके बाद अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
राज्य निर्वाचन आयोग की 27 जुलाई 2026 को जारी सूची में कुल 5,67,21,353 मतदाता दर्ज हैं। दूसरी ओर, भारत निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी सूची में मतदाताओं की संख्या 5,45,54,655 बताई गई है। दोनों आंकड़ों की तुलना करने पर 21,66,698 मतदाताओं का अंतर सामने आता है। यह अंतर आगामी स्थानीय चुनावों से पहले मतदाता सूची के सत्यापन और समन्वय को महत्वपूर्ण बनाता है।
मध्य प्रदेश में भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद जारी अंतिम सूची से कुल 34,25,078 मतदाताओं के नाम हटाए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें मृत मतदाता, अनुपस्थित पाए गए लोग और स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाता शामिल थे।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज विवरणों की जांच करना और ऐसे नामों को हटाना था, जो निर्धारित मानकों के अनुसार सूची में नहीं रहने चाहिए। हालांकि, SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में आई कमी और राज्य निर्वाचन आयोग की अलग सूची के बीच सामने आया अंतर अब चर्चा का विषय बन गया है।
दोनों सूचियां अलग-अलग प्रक्रियाओं और आधारों पर तैयार हुई थीं। ऐसे में उनके आंकड़ों का अंतर अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी अतिरिक्त नाम गलत हैं। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड का मिलान और मतदाता विवरणों का सत्यापन आवश्यक होगा।
जानकारी के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी मतदाता सूची तैयार करने के लिए पिछले वर्ष की सूची को आधार बनाया था। इसके बाद मतदान केंद्रों पर सूची प्रकाशित की गई और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे तथा आपत्तियां आमंत्रित की गईं।
बताया गया है कि उस समय भारत निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी और राज्य निर्वाचन आयोग को नई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसके कारण दोनों आयोगों की सूचियों को एक ही आधार पर तैयार करने की प्रक्रिया नहीं हो सकी।
राज्य निर्वाचन आयोग की व्यवस्था में मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां मिलने पर उनके आधार पर संशोधन किया जाता है। वहीं, भारत निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के विवरणों की व्यापक जांच की गई। इन अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण दोनों सूचियों में अंतर बना रह सकता है।
अब SSR के बाद दोनों सूचियों के आंकड़ों का मिलान किए जाने की योजना है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अंतर के पीछे पुराने रिकॉर्ड, नामों में बदलाव, स्थानांतरण या अन्य कारणों की क्या भूमिका है।
राज्य निर्वाचन आयोग की 27 जुलाई 2026 की सूची में कुल 5,67,21,353 मतदाता शामिल हैं। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,91,09,422 और महिला मतदाताओं की संख्या 2,76,10,389 दर्ज की गई है। इसके अलावा थर्ड जेंडर श्रेणी में 1,542 मतदाता शामिल हैं।
वहीं, भारत निर्वाचन आयोग की SIR के बाद जारी सूची में कुल 5,45,54,655 मतदाता बताए गए हैं। इनमें 2,81,71,989 पुरुष, 2,63,81,740 महिला और 926 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों सूचियों में पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या में भी अंतर है। इसलिए केवल कुल मतदाताओं की संख्या की तुलना करना पर्याप्त नहीं होगा। अंतिम मिलान के दौरान अलग-अलग श्रेणियों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
दोनों आयोगों की मतदाता सूचियों में अंतर को लेकर प्रदेश कांग्रेस पहले ही आपत्ति दर्ज करा चुकी है। विपक्ष की चिंता है कि जब मतदाताओं की संख्या में इतना बड़ा अंतर सामने आ रहा है, तो आगामी चुनावों के लिए तैयार की जाने वाली सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसमें पात्र मतदाताओं के नाम शामिल होना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों का नियमानुसार सुधार होना निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है। हालांकि, दोनों सूचियों में अंतर के कारणों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR के बाद जारी होने वाली मतदाता सूची से अपनी सूची का मिलान करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया के तहत दोनों सूचियों में दर्ज मतदाताओं के विवरणों की तुलना की जाएगी और आवश्यक संशोधनों के बाद अंतिम सूची तैयार करने की दिशा में काम होगा।
मध्य प्रदेश में अगले साल मई-जून के दौरान नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूची का अद्यतन और सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। अंतिम सूची तैयार होने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज रहें और सूची में मौजूद विसंगतियों को नियमानुसार दूर किया जाए।
फिलहाल दोनों आयोगों की सूचियों में दर्ज 21,66,698 मतदाताओं का अंतर सामने है। अब सबकी नजर SSR के बाद होने वाले मिलान पर रहेगी। इस प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता संख्या में अंतर के प्रमुख कारण क्या हैं और अंतिम मतदाता सूची में कितने संशोधन की आवश्यकता पड़ती है।
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