
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 28.10.2026) ने एक बार फिर मध्यप्रदेश भाजपा के तथाकथित बड़े नेताओं की जगह बता दी है।
मध्यप्रदेश में होने वाले राज्यसभा उप-चुनाव 2026 के लिए पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है।
सवाल यही है - क्या 7 करोड़ की आबादी वाले मध्यप्रदेश में, 165 विधायकों वाली भाजपा के पास राज्यसभा भेजने लायक एक भी सर्वगुण सम्पन्न नेता नहीं बचा है?
भाजपाई ही अब दबी जुबान में कह रहे हैं - एमपी के नेताओं की कोई पूछ-परख नहीं बची।
MP की राज्यसभा सीट - बाहरी नेताओं का पुनर्वास केंद्र:
पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखिए -
- कभी केरल लॉबी का नेता लाकर MP से राज्यसभा भेजा गया
- कभी पंजाबी चेहरे को MP के कोटे से दिल्ली भेजा गया
- कभी गुजरात के नजदीकी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा की वैतरणी पार कराई गई
- और अब पंजाब मूल के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा लाया जा रहा है।
मध्यप्रदेश अब - बाहरी नेताओं का गेस्ट हाउस' बन गया है।
जमीन पर काम करने वाला कार्यकर्ता कहां जाए?
प्रदेश में सालों से पसीना बहाने वाले, लाठियां खाने वाले, पार्टी का झंडा-डंडा उठाने वाले लाखों कार्यकर्ता और बड़े नेता आज सिर्फ सम्मेलनों में दरी बिछा रहे हैं, जाजम सजा रहे हैं, और बाहर से आए नेता के लिए जयकारा लगा रहे हैं।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा - "दिल्ली को लगता है MP में नेता नहीं, सिर्फ मजदूर हैं। चुनाव हम लड़वाएंगे, भीड़ हम जुटाएंगे, और राज्यसभा कोई बाहर वाला ले जाएगा।"
तीखा सवाल:
1. क्या मध्यप्रदेश भाजपा नेता सिर्फ विधानसभा लड़ने के लायक हैं, राज्यसभा के नहीं?
2. क्या केंद्रीय नेतृत्व को MP के किसी भी नेता पर भरोसा नहीं?
3. जब MP के हक की बात राज्यसभा में उठानी होगी, तो क्या बाहरी नेता MP की नर्मदा, MP के किसान, MP के आदिवासी का दर्द समझ पाएंगे?
कहने को तो यह राष्ट्रवादी पार्टी है, लेकिन मध्यप्रदेश के मामले में यह पूरी तरह आयातवादी बन गई है। और इसी वजह से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।
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