
इंदौर में आयोजित 'शहरी क्रांति 2.0' सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के शहरों को आधुनिक, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक-हितैषी बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इंदौर और भोपाल को आधुनिक महानगर के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र में लगभग 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने, 12 से 15 नई आधुनिक टाउनशिप विकसित करने और लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में उद्योग, आवास व रोजगार आधारित संतुलित विकास का लक्ष्य तय किया गया है। प्रदेश में अब तक 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े कार्य आगे बढ़ रहे हैं, जो 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को साकार करेंगे।
शहरी अधोसंरचना और जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सम्मेलन में 2,013.81 करोड़ रुपये के 6 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें इंदौर में जल प्रदाय के लिए 1,320.42 करोड़ रुपये, प्रमुख धार्मिक मंदिर सर्किट के विकास हेतु 643.39 करोड़ रुपये और रीवा जल प्रदाय योजना के लिए 50 करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था शामिल है। इसके साथ ही सरकार ने जनपरामर्श के लिए तीन महत्वपूर्ण ड्राफ्ट नीतियां प्रस्तुत कीं—अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनर्उपयोग नीति-2026 (जिसमें 2037 तक 50% उपचारित जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य है), अफोर्डेबल हाउसिंग एवं हैबिटेट नीति-2026, और मध्य प्रदेश भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026।
कार्यक्रम में नीति आयोग की 'इंदौर इकोनॉमिक रीजन' (एआईईआर)-2047 रिपोर्ट और भोपाल-इंदौर नगर निगम की सतत विकास रिपोर्ट (बीआरएसआर) जारी की गई। यह योजना मालवा-निमाड़ के आठ जिलों की अर्थव्यवस्था को वर्तमान 37.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 से 600 अरब डॉलर करने और 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने पर केंद्रित है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शहरों को आर्थिक विकास का मुख्य इंजन बताते हुए जनभागीदारी पर जोर दिया। सम्मेलन के दौरान सौर ऊर्जा, म्यूनिसिपल बॉन्ड, बीरसिंहपुर में 200 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और डेला ग्रुप द्वारा रातापानी में प्रस्तावित विश्वस्तरीय टाउनशिप सहित प्रमुख औद्योगिक समूहों के साथ वन-टू-वन निवेश चर्चाएं भी की गईं।
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