
मैहर में आस्था, सेवा और मानवीय संवेदनाओं का एक अत्यंत प्रेरक दृश्य सामने आया है। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर जबलपुर से पहुंचे पांच दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं और एक अन्य स्थान से आई पैर से दिव्यांग महिला श्रद्धालु को जिला प्रशासन और पुलिस बल की मदद से मां शारदा देवी के सुलभ व सुगम दर्शन कराए गए। शारीरिक चुनौतियों को दरकिनार करते हुए प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि माता के दरबार में पहुंचे इन विशेष श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
त्रिकूट पर्वत पर स्थित मंदिर की सीढ़ियों और ऊंचाई को ध्यान में रखते हुए नायब तहसीलदार शिवभूषण सिंह, ललित धार्वे और ड्यूटी पर तैनात महिला आरक्षक ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने स्वयं आगे बढ़कर दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं और दिव्यांग महिला का हाथ थामा, उन्हें सहारा दिया और ससम्मान रोपवे में बैठाकर पर्वत शिखर तक पहुंचाया। इसके पश्चात मंदिर के गर्भगृह में पूर्ण विधि-विधान और शांतिपूर्ण वातावरण में सभी को मां शारदा के दर्शन व पूजन का लाभ दिलाया गया।

दर्शन-पूजन संपन्न होने के उपरांत कलेक्टर एवं मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति की अध्यक्ष विदिशा मुखर्जी ने सभी दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं से आत्मीय भेंट की। उन्होंने श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति का वंदन करते हुए उन्हें मां शारदा के आशीर्वाद स्वरूप चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। प्रशासनिक अधिकारियों के इस आत्मीय व्यवहार और सुगम व्यवस्था से अभिभूत होकर दृष्टिबाधित व दिव्यांग श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया और अपनी सुखद यात्रा पर प्रसन्नता जताई।

मां शारदा धाम में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की इस मानवीय पहल ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सुशासन और सच्ची सेवा वही है, जहां समाज के अंतिम और दिव्यांग वर्ग की आस्था का पूरा सम्मान हो। शारीरिक अक्षमताएं मां के दरबार में हाजिरी लगाने में कभी बाधा न बनें, इसके लिए मैहर जिला प्रशासन विशेष आवश्यकता वाले और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर सुगम दर्शन, व्हीलचेयर और रोपवे जैसी सुविधाएं निरंतर सुनिश्चित कर रहा है।
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